अमेरिका से भारत तक विदेशी फंडिंग के कथित नेटवर्क पर सवाल
CAIR और सोरोस विवाद से क्या खुलेंगे बड़े राज?
पूनम शर्मा
ताश का महल ढह रहा है
फ्लोरिडा में एक छोटी-सी हलचल के रूप में जो शुरुआत हुई थी, वह अब एक ऐसे भू-राजनीतिक भूकंप का रूप लेती दिखाई दे रही है, जिसका असर कथित वैश्विक भारत-विरोधी तंत्र के केंद्र तक पहुंच रहा है। एक बड़े घटनाक्रम में फ्लोरिडा ने राज्य कानून के तहत काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) को घरेलू आतंकवादी संगठन घोषित किया है। अब पर्दा हटता दिखाई दे रहा है और धन के कथित खतरनाक नेटवर्क को सामने लाने की कोशिश तेज हो गई है।
वर्षों से वॉशिंगटन की छाया में एक अत्यंत संगठित और सुव्यवस्थित नेटवर्क के सक्रिय रहने का आरोप लगाया जाता रहा है। आरोप के मुताबिक, इसकी कार्यप्रणाली सरल लेकिन घातक थी—जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस (OSF) ने विभिन्न एडवोकेसी समूहों को लाखों डॉलर दिए, जबकि CAIR से जुड़े संगठनों ने कथित तौर पर “नागरिक अधिकारों” के नाम पर इन संसाधनों का इस्तेमाल अपने अभियानों के लिए किया। उनका उद्देश्य अधिकारों की रक्षा नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा के अनुरूप दबाव और अनुपालन सुनिश्चित करना था।
निशाने पर कौन था? भारत
वॉशिंगटन में अमेरिकी सरकार पर दबाव बनाने के लिए लॉबिंग से लेकर कश्मीर, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और वक्फ कानून जैसे भारत के आंतरिक मामलों पर लगातार सवाल उठाने तक—इस नेटवर्क पर आरोप लगाया गया है कि उसने भारतीय हितों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अभियान चलाया।
यह रणनीति ऊपर से नीचे तक चलने वाले एक सुनियोजित अभियान की तरह काम करती थी। CAIR और सोरोस समर्थित संस्थाओं द्वारा वॉशिंगटन में एक नैरेटिव तैयार किया जाता, उसे अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंचाया जाता और फिर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता। लेकिन आरोप यहीं समाप्त नहीं होते।
इस कथित रूप से निर्मित आक्रोश को व्यवस्थित तरीके से भारत के राजनीतिक तत्वों, नागरिक समाज के कुछ समूहों और विपक्षी वर्गों तक पहुंचाया गया, ताकि भारत के भीतर सीधे सड़कों पर अस्थिरता और अशांति पैदा की जा सके।
‘Hindutva Hate Monitor’ का विवाद
क्या आपको वह घटना याद है जब CAIR Texas ने कथित तौर पर भारतीय प्रवासी समुदाय पर नजर रखने के उद्देश्य से “Hindutva Hate Monitor” के लिए इंटर्नशिप निकाली थी? इसके खिलाफ प्रतिक्रिया तेज होने के बाद कथित तौर पर संगठन को पीछे हटना पड़ा।
यह केवल किसी सरकारी नीति के विरोध का मामला नहीं था, बल्कि एक सभ्यता को निशाना बनाकर चलाया गया अभियान था।
अब वित्तीय नेटवर्क पर उठ रहे सवाल
अब कथित वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलने का दावा किया जा रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की Oversight Committee ने Treasury Department से Open Society Foundations और CAIR से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके बाद CAIR ने स्वयं को सोरोस के साथ जोड़कर देखे जाने का विरोध किया। लेकिन वित्तीय लेन-देन अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं।
अमेरिका में राज्य स्तर पर की गई कथित आतंकवादी संगठन संबंधी घोषणाओं के बाद इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग और गतिविधियों को लेकर बहस और तेज हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल—भारत के भीतर कौन?
अब सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि क्या ऐसे संगठन भारत को निशाना बना रहे हैं। इससे भी बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि भारत के भीतर कौन लोग या संगठन ऐसे विदेशी नेटवर्क से कथित तौर पर धन प्राप्त कर रहे हैं?
क्या विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल भारत के भीतर अशांति, राजनीतिक टकराव या सामाजिक अस्थिरता को बढ़ाने के लिए किया गया? यदि ऐसा कोई वित्तीय संबंध मौजूद है, तो उसकी जांच और प्रमाण सामने आना आवश्यक है।
जिस वैश्विक “भारत-विरोधी इकोसिस्टम” पर लंबे समय से आरोप लगाए जाते रहे हैं, उसकी गतिविधियों और वित्तीय संबंधों पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं—और इसकी वास्तविकता सामने लाने के लिए तथ्यों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच निर्णायक होगी।
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