राजस्थान: झालावाड़ स्कूल भवन हादसे में 7 बच्चों की मौत, 5 शिक्षक निलंबित

समग्र समाचार सेवा
जोड़िया/झालावाड़, 27 जुलाई: राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना ब्लॉक, पिपलोदी सरकारी स्कूल भवन के ढहने से एक दर्दनाक हादसे में 7 बच्चों की मौत हुई है। शिक्षा विभाग ने हेड मास्टर मीना गर्ग, शिक्षक जावेद अहमद, रामविलास लववंशी, कन्हैयालाल सुमन, और बद्रीलाल लोधा को निलंबित कर दिया है।

हादसे का ब्योरा

इस हादसे में पाँच बच्चे मौके पर ही शहीद हो गए जबकि दो की इलाज के दौरान चिकित्सालय में मौत हुई। मृतकों में मीना और कान्हा, सगे भाई-बहन थे। एक गृहस्थ परिवार की चार बेटियों का इकलौता बेटा भी इस हादसे में खो गया। लगभग 21 बच्चे घायल हुए, जिनमें से 9 की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी का इलाज झालावाड़ के अस्पताल में जारी है।

ग्रामीणों का आक्रोश

हादसे के बाद ग्रामीणों ने झालावाड़-मनोहरथाना मार्ग पर स्थित गुराडी चौराहा पर जाम लगा दिया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कर्मियों और वाहनों पर पथराव किया और एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की।

अधिकारी कार्रवाई और रिपोर्ट

राजस्थान मानवाधिकार आयोग, जयपुर ने स्वप्रेरित संज्ञान लेते हुए जिला मजिस्ट्रेट, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा निदेशक (बीकानेर) एवं जिला एसपी से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जी.आर. मूलचंदानी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा राशि उपलब्ध कराएँ।

मरम्मत की लापरवाही उजागर

ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले चार वर्षों से स्कूल भवन की छत की मरम्मत की मांग कर रहे थे, लेकिन कोई प्रशासनिक सुनवाई नहीं हुई। स्कूल 10 दिन की छुट्टी होने के बाद एक दिन में फिर से खोल दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ा हादसा घटित हुआ। यह घटना सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति और प्रशासन की लापरवाही की भी बानगी है।

शिक्षा विभाग की रिपोर्ट

राजस्थान विधानसभा में शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 2256 सरकारी स्कूल भवनों की हालत जर्जर पाई गई है। इसके बावजूद 2024‑25 के बजट में केवल 250 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी, जिससे मात्र 750 स्कूल भवनों की मरम्मत की जा सकी। इस वित्तीय अक्षमता ने सिस्टम की सीमाओं को उजागर किया है।

यह दुर्घटना दर्शाती है कि शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा और संरचना को लेकर कितनी अनदेखी की जाती है। मरम्मत की मांगों पर वर्षों तक प्रतिक्रिया न देना, बाल सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही है। विद्यालय में भवन का अविलंब परीक्षण, मरम्मत और रखरखाव अनिवार्य करना होगा।

सरकार को प्राथमिकता सूची के आधार पर मरम्मत योजनाएँ, स्थानीय निगरानी समितियों और तत्काल रिपोर्टिंग तंत्र मुहैया कराना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

पिपलोदी सरकारी स्कूल भवन हादस ने हमें चेताया है कि शिक्षा और संरचना क्षेत्र में गंभीर सुधार की आवश्यकता है। अब वक्त है कि सरकार केंद्र-अंचल स्तर पर सही ढंग से निवेश और निगरानी करे, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और कभी किसी स्कूल भवन के गिरने जैसी त्रासदी न दोहराई जाए।

 

 

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