राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ 2 सितंबर को चुना जाएगा

  • श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ के लिए 16 में से 3 नामों का पैनल तैयार किया जाएगा।
  • सर्च कमेटी के पैनल पर ट्रस्ट अध्यक्ष विचार करेंगे, 2 सितंबर को संभावित अंतिम चयन।
  • चयन प्रक्रिया में सेना के पूर्व अधिकारी, सेवानिवृत्त IAS/IPS, अनुभवी पेशेवर शामिल; नेतृत्व, तकनीकी समझ व रणनीतिक सोच को प्राथमिकता।
  • ट्रस्ट के लिए सीईओ पद मंदिर प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और भविष्य की परियोजनाओं के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

समग्र समाचार सेवा 

अयोध्या, 13 अगस्त: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुनने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सीईओ पद के लिए देशभर से मिले हजारों आवेदनों में से चयनित 16 उम्मीदवारों के अंतिम साक्षात्कार पूरे हो चुके हैं। अब सर्च कमेटी तीन नामों का पैनल ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपेगी, जिस पर 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में अंतिम निर्णय की संभावना है।

सीईओ के लिए चयन प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से आगे बढ़ाया गया। अंतिम दौर में पहुंचे उम्मीदवारों में पूर्व सैन्य अधिकारी, सेवानिवृत्त IAS-IPS और कई अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। चयन में प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल, तकनीकी समझ और बड़े संस्थान के प्रबंधन का अनुभव मुख्य मानदंड रहे। सर्च कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे जैसे विशेषज्ञ शामिल थे।

ट्रस्ट के लिए सीईओ पद का महत्व मंदिर के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा, आर्थिक प्रबंधन और भविष्य की परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बेहद अहम है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और व्यवस्थाओं के विस्तार के मद्देनजर एक सक्षम प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत महसूस की जा रही है।

सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों की दीर्घकालीन दृष्टि, रणनीतिक सोच और आधुनिक प्रबंधन क्षमता को भी परखा। अब 16 में से तीन नाम पैनल के रूप में ट्रस्ट को दिए जाएंगे। उम्मीद है कि 2 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट इनमें से एक नाम पर मुहर लगाकर राम मंदिर के पहले सीईओ की औपचारिक घोषणा करेगा।

ट्रस्ट की यह ऐतिहासिक नियुक्ति मंदिर प्रशासन को संस्थागत मजबूती देने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं और परियोजनाओं के सुचारू संचालन में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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