राष्ट्रीय परशुराम परिषद का राष्ट्रव्यापी विस्तार शुरू
सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक उत्थान के लिए राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने देश भर में अपने संगठन के विस्तार की बड़ी योजना का किया ऐलान।
- राष्ट्रीय परशुराम परिषद ने देश भर में संगठन विस्तार की बनाई योजना।
- सनातन संस्कृति के संरक्षण और युवाओं को जोड़ने पर रहेगा विशेष जोर।
- संस्थापक पंडित सुनील भराला के मार्गदर्शन में तय हुई रूपरेखा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 02 नवंबर: भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति, परंपराओं के संरक्षण और समाज के वैचारिक व सामाजिक उत्थान के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत प्रमुख राष्ट्रीय सामाजिक संगठन ‘राष्ट्रीय परशुराम परिषद’ (Rashtriya Parshuram Parishad) ने अपने संगठन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत राष्ट्रव्यापी विस्तार योजना (Nationwide Expansion Plan) की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक और वरिष्ठ नेता पंडित सुनील भराला के मार्गदर्शन में यह निर्णय लिया गया है कि देश के विभिन्न राज्यों, जिलों और ग्रामीण स्तर तक संगठन की इकाइयों को और अधिक मजबूत तथा सक्रिय बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय परशुराम परिषद लंबे समय से भगवान परशुराम के आदर्शों, न्याय, राष्ट्रधर्म और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए जानी जाती है। हाल के वर्षों में महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में संगठन की ओर से किए गए धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यों के बाद अब इसे देश के हर राज्य में संगठनात्मक रूप से विस्तार देने की रूपरेखा तैयार की गई है।

संगठन के मुख्य उद्देश्य और वैचारिक पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय परशुराम परिषद का मुख्य उद्देश्य केवल एक विशिष्ट वर्ग का उत्थान नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज में फैली कुरीतियों को दूर करना और वैचारिक तथा आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण करना है। परिषद के प्रमुख लक्ष्यों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
सनातन संस्कृति का संरक्षण: युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, वेदों, शास्त्रों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ना।
सामाजिक समरसता और जागरूकता: समाज में व्याप्त विसंगतियों, कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ जन-जागृत अभियान चलाना तथा सकारात्मक माहौल का निर्माण करना।
महिला सुरक्षा एवं सम्मान: महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के मुद्दों पर समाज को जागरूक करना तथा राष्ट्रहित में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
संस्थापक पंडित सुनील भराला के नेतृत्व में परिषद ने इससे पहले भगवान परशुराम चालीसा के राष्ट्रव्यापी प्रचार और विभिन्न वैचारिक संगोष्ठियों के माध्यम से सनातन चेतना को मजबूत करने का कार्य किया है। अब इस नए राष्ट्रव्यापी विस्तार के जरिए संगठन का प्रयास है कि देश के दूरदराज के इलाकों तक युवा और प्रबुद्ध वर्ग को जोड़ा जाए।

युवाओं की सहभागिता और रोजगार प्रशिक्षण पर जोर
विस्तार योजना के तहत विशेष रूप से युवाओं (Youth Wing) को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विभिन्न महानगरों और जिला स्तर पर युवाओं को वैचारिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ उनके कौशल विकास (Skill Development) और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी काम किया जा रहा है। संगठन का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़कर ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सकता है।
विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर भगवान परशुराम भवन के निर्माण, सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इससे समाज के लोगों को एक मंच पर इकट्ठा होने और सामाजिक कल्याण के कार्यों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।

आगामी कार्ययोजना और देशव्यापी दौरे
राष्ट्रीय परशुराम परिषद की केंद्रीय टीम जल्द ही देश के विभिन्न राज्यों का दौरा करेगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों में नई जिला और तहसील इकाइयों का गठन किया जाएगा। साथ ही, प्रबुद्ध सम्मेलन, संत संवाद और सामाजिक न्याय गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों और संतों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा शुरू किया गया यह राष्ट्रव्यापी विस्तार अभियान केवल एक संगठनात्मक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक एकता को और अधिक गहराई प्रदान करने की एक बड़ी पहल है। इसके जरिए संगठन समाज के हर वर्ग को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
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