पटना से संसद तक का सफर: रविशंकर प्रसाद ने मनाया 71वां जन्मदिन

समग्र समाचार सेवा
पटना, 30 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता, वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद आज अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीति और कानून दोनों ही क्षेत्रों में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। पटना की गलियों से संसद और केंद्रीय मंत्री पद तक का उनका सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

जन्म और शिक्षा

रविशंकर प्रसाद का जन्म 30 अगस्त 1954 को पटना (बिहार) में हुआ। उनके पिता ठाकुर प्रसाद हाईकोर्ट के जाने-माने वकील थे और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी रहे। उनकी माता का नाम विमला प्रसाद है।

प्रसाद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पटना से प्राप्त की और बाद में पटना विश्वविद्यालय से B.A. ऑनर्स, M.A. और LLB की डिग्रियां हासिल कीं। छात्र जीवन से ही वे बेहद सक्रिय और प्रतिभाशाली माने जाते थे।

वकालत और राजनीतिक शुरुआत

रविशंकर प्रसाद ने अपने करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की। इसके बाद उन्होंने वकालत के क्षेत्र में कदम रखा और पटना हाईकोर्टसुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की।

दिलचस्प बात यह है कि वे एक समय लालू प्रसाद यादव के वकील भी रहे। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का भी केस पटना हाईकोर्ट में लड़ा।

राजनीतिक जीवन और उपलब्धियां

रविशंकर प्रसाद पहली बार 2000 में सांसद बने। इसके बाद 2001 में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कोयला और खान राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। बाद में वे विधि और न्याय मंत्रालय में भी राज्य मंत्री रहे।

उनके कार्यकाल में फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए, जिससे न्याय प्रणाली को गति मिली।

2006 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और फिर से राज्यसभा भेजा गया। नरेंद्र मोदी सरकार में वे कानून मंत्री और आईटी मंत्री भी रहे। डिजिटल इंडिया अभियान और डेटा प्रोटेक्शन कानून को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अहम रही।

व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि

रविशंकर प्रसाद की राजनीतिक छवि अन्य नेताओं से अलग मानी जाती है क्योंकि उन पर कभी कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। वे हमेशा साफ-सुथरी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी सहयोगियों में उनकी गिनती होती है। पार्टी प्रवक्ता के रूप में उन्होंने कई बार भाजपा का मजबूती से पक्ष रखा और विपक्ष पर तीखे हमले भी किए।

रविशंकर प्रसाद का जीवन एक ऐसा उदाहरण है, जिसमें वकालत और राजनीति दोनों का संतुलन देखने को मिलता है। अपने 71वें जन्मदिन पर वे न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं बल्कि पूरे देश में सम्मान और प्रेरणा के प्रतीक बने हुए हैं।

 

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