समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 जुलाई: भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में 18 दिन बिताने के बाद आज धरती पर लौटने की तैयारी कर ली है। शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर पृथ्वी के लिए रवाना हो चुकी है। उनका कैप्सूल आज दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर कैलिफोर्निया के तट के पास समुद्र में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करेगा।
कैसे होगा डी-ऑर्बिट बर्न
स्प्लैशडाउन से पहले सबसे बड़ा तकनीकी पड़ाव डी-ऑर्बिट बर्न है। यह प्रक्रिया स्प्लैशडाउन से ठीक 54 मिनट पहले दोपहर 2 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट की गति 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर करीब 24 किलोमीटर प्रति घंटा की जाएगी। डी-ऑर्बिट बर्न के दौरान पृथ्वी के वायुमंडल में घर्षण से तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का ट्रंक हिस्सा जलता हुआ नजर आता है। इसी घर्षण के दौरान थ्रस्टर की मदद से स्पीड घटाई जाती है, ताकि स्प्लैशडाउन सुरक्षित तरीके से हो सके।
कैसे खुलेगा पैराशूट
डी-ऑर्बिट बर्न के बाद दोपहर 2 बजकर 26 मिनट पर स्पेसक्राफ्ट से ट्रंक अलग होगा और चार मिनट बाद नोजकोन बंद हो जाएगा। इसके बाद जब पृथ्वी से दूरी घटकर 6 किलोमीटर रह जाएगी तब स्टेबलाइजिंग पैराशूट खुलेंगे। इसके एक मिनट बाद मेन पैराशूट खुलेगा, जिससे कैप्सूल की गति कम होकर 24 किलोमीटर प्रति घंटा तक आ जाएगी।
कैसे होता है स्प्लैशडाउन
स्प्लैशडाउन का मतलब है कैप्सूल का समुद्र में सुरक्षित उतरना। जब कैप्सूल पानी में उतरता है तो अंदर बैठे अंतरिक्ष यात्री स्पेस शूट पहने रहते हैं और कैप्सूल का तापमान स्थिर रहता है। समुद्र में पहले से मौजूद टीम बोट के जरिए कैप्सूल तक पहुंचती है, फिर उसे बाहर निकालकर नोज खोला जाता है और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर लाया जाता है। इसके बाद सभी को आइसोलेशन सेंटर ले जाया जाएगा।
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