कौन हैं रितु तावड़े ? BMC में भाजपा की पहली मेयर बनने की कहानी

पूनम शर्मा
जमीनी राजनीति से नेतृत्व तक

मुंबई जैसे महानगर में राजनीति केवल मंचों पर भाषण देने से नहीं चलती, वह गलियों की धूल, लोगों की परेशानियों और रोज़मर्रा की चुनौतियों से बनती है। रितु तावड़े का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा है। वे उन नेताओं में हैं, जिन्होंने वार्ड स्तर पर काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। स्थानीय मुद्दों—जल आपूर्ति, साफ़-सफाई, महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं—पर उनकी सक्रियता ने उन्हें लोगों के बीच भरोसेमंद चेहरा बनाया।
उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा “सुनना” रहा है। वे बैठकों से ज़्यादा गलियों में जाकर लोगों की समस्याएँ समझने को प्राथमिकता देती हैं। यही वजह है कि पार्टी संगठन के भीतर भी उनकी छवि एक जमीनी नेता की बनी।

सामाजिक सरोकार और महिला नेतृत्व

रितु तावड़े के कामकाज में महिलाओं और युवाओं से जुड़ी पहल खास जगह रखती है। महिला स्वयं-सहायता समूहों को सशक्त करना, कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन—ये सब उनके काम का हिस्सा रहे हैं।
बीएमसी जैसी बड़ी नगर निगम में भाजपा की पहली मेयर बनना सिर्फ राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह संकेत देता है कि महानगरों की राजनीति में महिलाओं की भूमिका अब हाशिये पर नहीं, केंद्र में है। रितु तावड़े के नेतृत्व से कई युवा महिलाएँ सार्वजनिक जीवन में कदम रखने के लिए प्रेरित हो सकती हैं।

बीएमसी में नई उम्मीदें और चुनौतियाँ

बीएमसी देश की सबसे बड़ी नगर निकायों में से एक है। यहां कचरा प्रबंधन, जल निकासी, परिवहन और शहरी नियोजन जैसी चुनौतियाँ रोज़मर्रा का हिस्सा हैं। रितु तावड़े के सामने अपेक्षाओं का बोझ भी उतना ही बड़ा होगा।
उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे पारदर्शिता बढ़ाएँगी, नागरिक सेवाओं को तेज़ और जवाबदेह बनाएँगी तथा शहर की अवसंरचना में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएँगी। राजनीतिक मतभेदों के बीच संतुलन साधना भी उनकी नेतृत्व परीक्षा होगी।
अगर वे ज़मीनी अनुभव को नीतिगत फैसलों से जोड़ पाईं, तो बीएमसी में उनका कार्यकाल सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, प्रभावशाली भी साबित हो सकता है।

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