समग्र समाचार सेवा
नागपुर, 29 अगस्त: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने उन धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जाता रहा है कि संघ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लेकर फैसले लेता है या उसकी राजनीतिक दिशा तय करता है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के दौरान भागवत ने साफ किया कि संघ एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज का संगठन और राष्ट्र निर्माण है।
राजनीतिक हस्तक्षेप से इंकार
मोहन भागवत ने कहा,
“आरएसएस का कार्य राजनीति करना नहीं है। हमारा काम समाज को जोड़ना और राष्ट्रहित में काम करना है। भाजपा समेत किसी भी राजनीतिक दल के लिए संघ निर्णय नहीं लेता। लोग अपने विवेक से राजनीति में जाते हैं और निर्णय करते हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का भाजपा से “वैचारिक संबंध” जरूर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संघ प्रत्यक्ष रूप से उसके लिए निर्णयकारी शक्ति है।
भाजपा और संघ के रिश्ते पर स्पष्टीकरण
भागवत ने कहा कि भाजपा में काम करने वाले कई नेता और कार्यकर्ता संघ से जुड़े रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संघ राजनीतिक रणनीतियां तय करता है।
उन्होंने कहा,
“संघ का राजनीति में प्रत्यक्ष दखल नहीं है। हमारी भूमिका समाज में जागरूकता फैलाने और राष्ट्रहित के लिए लोगों को तैयार करने की है।”
इस बयान को भाजपा और संघ के रिश्तों पर चल रही लगातार चर्चाओं और विवादों का जवाब माना जा रहा है।
विपक्ष के आरोपों का जवाब
गौरतलब है कि विपक्ष लंबे समय से भाजपा और आरएसएस पर यह आरोप लगाता रहा है कि भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों के पीछे संघ का हाथ होता है। कांग्रेस समेत कई दलों ने अक्सर कहा है कि भाजपा संघ के निर्देशों पर चलती है।
मोहन भागवत का यह बयान इन आरोपों को सीधे तौर पर नकारता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भाजपा को आगामी चुनावों से पहले “स्वतंत्र पार्टी” के रूप में प्रस्तुत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
संघ का फोकस समाज पर
डॉ. भागवत ने आगे कहा कि संघ का काम समाज के विभिन्न वर्गों में सामंजस्य और संगठन को बढ़ाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राजनीति में चाहे हों या अन्य किसी क्षेत्र में, उन्हें समाज और राष्ट्र के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मोहन भागवत के इस बयान ने भाजपा और संघ के रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा इसे अपने लिए राहत के तौर पर देख सकती है, वहीं विपक्ष यह सवाल उठाएगा कि क्या वाकई भाजपा संघ से स्वतंत्र है?
हालांकि भागवत के मुताबिक, संघ अपनी जड़ों पर कायम है और उसका लक्ष्य राजनीति नहीं बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण है।
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