समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 12 फरवरी:विधानसभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में विधायक अरविन्द सावंत ने सदन की कार्यप्रणाली, विपक्षी सदस्यों के अधिकारों और हालिया घटनाक्रम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने कहा कि सदन लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहाँ जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार हाल के सत्रों में विपक्षी विधायकों को बोलने से रोका गया, नोटिसों को स्वीकार नहीं किया गया और सदन की कार्यवाही के दौरान नियमों का पालन समान रूप से नहीं हुआ।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में सत्ता पक्ष को विशेष प्राथमिकता दी गई, जबकि विपक्ष के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया। विधायक सवंत ने अध्यक्ष से अपेक्षा जताई कि वे निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए सदन की गरिमा और परंपराओं की रक्षा करें। उन्होंने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष का दायित्व केवल कार्यवाही संचालित करना नहीं, बल्कि सभी सदस्यों को समान अवसर उपलब्ध कराना भी है।
पत्र में कई ठोस मांगें भी रखी गई हैं। इनमें प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान विपक्ष को पर्याप्त समय दिए जाने, नियमों के अनुसार स्थगन प्रस्तावों पर विचार, तथा सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए निष्पक्ष कार्रवाई शामिल है। विधायक ने कहा कि यदि सदन में संवाद और बहस के अवसर सीमित किए जाते हैं तो लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है और जनता की आवाज दब जाती है।
यह पत्र आगामी सत्रों से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। विपक्षी दल लंबे समय से सदन में मुद्दों को उठाने का अवसर न मिलने की शिकायत करते रहे हैं। वहीं, सरकार का पक्ष है कि कार्यवाही नियमों के अनुरूप चलाई जाती है और व्यवधान के कारण कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं।
इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आ सकती है। यदि मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए जाते हैं तो सदन की कार्यप्रणाली में सुधार संभव है। वहीं, विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
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