समग्र समाचार सेवा
बीजिंग/तियानजिन, 29 अगस्त: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख नेताओं का स्वागत करने जा रहे हैं। यह सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में आयोजित होगा और इसे SCO के इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन बताया जा रहा है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी इस शिखर सम्मेलन में राज्य प्रमुखों की परिषद की 25वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। साथ ही, वह विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
पश्चिमी ढांचे से अलग सहयोग मॉडल
राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उद्देश्य इस सम्मेलन को एक नए क्षेत्रीय सहयोग मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना है, जो पश्चिमी देशों के ढांचे से अलग होगा। चीन का मानना है कि एशियाई देशों को अपनी स्वतंत्र रणनीतिक साझेदारी विकसित करनी चाहिए, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्राथमिकता दी जाए।
प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शी जिनपिंग ने व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है। मोदी इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ कई अन्य देशों के नेताओं से भी द्विपक्षीय मुलाकातें कर सकते हैं।
भारत 2017 से SCO का सदस्य है और 2022-23 में परिषद की अध्यक्षता भी कर चुका है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों के अलावा भारत-रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ सहयोग को भी नई दिशा दे सकती है।
एशियाई नेताओं की भागीदारी
इस सम्मेलन में न सिर्फ रूस और भारत बल्कि तुर्की, ईरान, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के शीर्ष नेता भी शामिल होंगे। इससे यह स्पष्ट है कि SCO अब केवल सुरक्षा मंच नहीं रह गया, बल्कि यह धीरे-धीरे बहुपक्षीय आर्थिक और राजनीतिक सहयोग का अहम प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है।
शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रमुख नेता
- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगान
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेझेश्कियन
- इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियंटो
- मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु
- मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम
- वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन चिन्ह
- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली
- म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग
इनके अलावा कई अन्य मध्य एशियाई देशों के नेता भी तियानजिन पहुंचेंगे।
महत्व और संभावित प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति में एशिया के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करेगा। भारत और रूस की उपस्थिति से चीन को न सिर्फ रणनीतिक संतुलन मिलेगा, बल्कि पश्चिमी देशों को यह संदेश भी जाएगा कि एशिया अपने बहुपक्षीय सहयोग ढांचे को और मजबूत कर रहा है।
तियानजिन में होने वाला यह SCO शिखर सम्मेलन केवल एक कूटनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि एशिया की नए वैश्विक व्यवस्था में भूमिका को परिभाषित करने का मंच भी साबित हो सकता है। मोदी-पुतिन-शी की मुलाकातें इस आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना देंगी।
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