उपराष्ट्रपति ने ‘सिंग, डांस एंड लीड’ पुस्तक का विमोचन किया
नैतिक स्पष्टता और सेवा भाव ही सच्चे नेतृत्व की पहचान : उपराष्ट्रपति
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श्रील प्रभुपाद के जीवन को मूल्य-आधारित नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बताया
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भारतीय सभ्यता को सेवा और अनुशासन पर आधारित नेतृत्व की परंपरा बताया
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आनंदपूर्ण, सहभागी और मानवीय नेतृत्व की अवधारणा पर बल
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 जनवरी: भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति निवास, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पुस्तक सिंग, डांस एंड लीड: श्रील प्रभुपाद के जीवन से नेतृत्व के पाठ का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार हिंदोल सेनगुप्ता हैं।
भारतीय सभ्यता से निकले नेतृत्व के आदर्श
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक सभ्यतागत नेतृत्वकर्ता रहा है, जहां नेतृत्व की अवधारणा सदैव मूल्यों, सेवा और आत्मानुशासन से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जीवन इसी परंपरा का सजीव उदाहरण है, जो उद्देश्य, विनम्रता और नैतिक स्पष्टता पर आधारित नेतृत्व को दर्शाता है।
समय के साथ और अधिक प्रासंगिक हुए विचार
उपराष्ट्रपति ने कहा कि तेज़ी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में स्वामी प्रभुपाद के विचार आज पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभुपाद द्वारा स्थापित संस्थाएं आने वाली पीढ़ियों तक मानवता की सेवा करती रहेंगी। उनके नेतृत्व की विशेषता यह रही कि भले ही बहुत से लोग उनका नाम न जानते हों, लेकिन दुनिया भर में लाखों लोग उनके कार्यों से प्रभावित हैं।
सेवा और विश्वास पर आधारित वैश्विक आंदोलन
उपराष्ट्रपति ने स्मरण कराया कि वृद्धावस्था में भी स्वामी प्रभुपाद ने विभिन्न महाद्वीपों की यात्रा कर केवल धार्मिक दर्शन नहीं, बल्कि अनुशासन, भक्ति और आनंद से युक्त जीवनशैली का संदेश दिया। उन्होंने 1966 में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी वैश्विक स्वीकार्यता अधिकार नहीं, बल्कि सेवा, विश्वास और स्पष्ट दृष्टि पर आधारित नेतृत्व का परिणाम है।
आनंदपूर्ण और मानवीय नेतृत्व का संदेश
पुस्तक के मूल विचार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिंग, डांस एंड लीड यह संदेश देती है कि नेतृत्व आनंदपूर्ण, सहभागी और गहराई से मानवीय हो सकता है। स्वामी प्रभुपाद ने आदेश देने के बजाय प्रेरणा के माध्यम से नेतृत्व किया और सादगी व भक्ति में रचे-बसे रहते हुए स्थायी संस्थानों की नींव रखी।
सार्वजनिक जीवन और युवाओं के लिए प्रेरणा
संत-कवि तिरुवल्लुवर के विचारों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेतृत्व की शुरुआत स्पष्ट सोच और उच्च आंतरिक दृष्टि से होती है, जिसे सामूहिक प्रयासों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक युवाओं को भौतिक सफलता से आगे उद्देश्य खोजने और नेतृत्व को समाज के व्यापक हित में उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगी।
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अक्षय पात्र फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष मधु पंडित दास, वरिष्ठ पदाधिकारी, विद्वान और आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे।
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