सोनम वांग्चुक :अनशन के पीछे सियासी खेल पत्नी की भूमिका,विदेशी फंडिंग
पत्नी गीतांजलि की जिद या कोई छुपा एजेंडा?
पूनम शर्मा
सोनम वांग्चुक के जंतर-मंतर पर अनशन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में पत्नी गीतांजलि ने याचिका दायर की कि उन्हें अस्पताल से तत्काल रिहा किया जाए और वे अपनी पसंद की मेडिकल सुविधा चुन सकें। लेकिन सवाल यह है कि जब वांग्चुक की हालत लगातार बिगड़ रही है, ऐसे में पत्नी का अनशन जारी रखने पर जोर देना क्या सही है? क्या यह सिर्फ आंदोलन की सफलता का जुनून है या उनके पीछे कोई छुपा मकसद है? गीतांजलि का ज़िद्द भरा रुख कहीं वांग्चुक की जान जोखिम में डालने जैसा है। क्या वाकई वे अपने पति की संपत्ति या अन्य लाभ के लिए ऐसा कर रही हैं?
सोनम वांग्चुक: बलि का बकरा या राजनीतिक मोहरा?
वांग्चुक के समर्थकों और कुछ अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि उन्हें जानबूझकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सवाल उठता है कि कहीं यह सब राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाने का रास्ता तो नहीं? अभिजीत दीपके जैसे कुछ नेता अरविंद केजरीवाल की तरह उभरना चाहते हैं और वांग्चुक की लोकप्रियता का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में, वांग्चुक का अनशन एक सोची-समझी रणनीति के तहत लंबे समय तक खींचा जा रहा है ताकि राजनीतिक माहौल को गरमाया जा सके और कुछ नए चेहरे राष्ट्रीय राजनीति में जगह बना सकें।
विदेशी फंडिंग और पीआर एजेंसियों की भूमिका
वांग्चुक के आंदोलन में सोशल मीडिया और ब्लॉगर्स की बड़ी भूमिका सामने आई है। चर्चा है कि तीन बड़ी पीआर एजेंसियाँ—DGwhistle, Monkentertainment और अन्य—इस पूरे आंदोलन को मैनेज कर रही हैं। बताया जाता है कि विदेशी फंडिंग, खासतौर पर सोरोस से मिल रही है और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पैसे देकर ब्लॉगर और इन्फ्लूएंसरों को वांग्चुक के समर्थन में पोस्ट लिखवाई जा रही हैं। आरोप है कि यह पूरा अभियान भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। ऐसे में, वांग्चुक के अनशन की असली मंशा और इसके पीछे की ताकतें सवालों के घेरे में हैं।
सोनम वांग्चुक का अनशन अब सिर्फ व्यक्तिगत या शैक्षिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक साजिश, व्यक्तिगत लाभ और विदेशी फंडिंग के जाल में उलझता नजर आ रहा है। सवाल यही है कि क्या वांग्चुक को बलि का बकरा बना दिया गया है, और क्या उनकी पत्नी और सहयोगी राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं?
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