समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 31 अगस्त: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शनिवार देर रात मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा था भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे की मांगों पर चर्चा करना।
मंत्रिमंडलीय उप-समिति की भूमिका
राधाकृष्ण विखे पाटिल, मराठा समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति के अध्यक्ष हैं। यही वजह है कि सरकार और आंदोलनकारी नेताओं के बीच सेतु का काम वह कर रहे हैं।
मनोज जरांगे की भूख हड़ताल
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे शुक्रवार से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
- जरांगे की मुख्य मांग है कि मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में शामिल किया जाए।
- उनका कहना है कि मराठों को कृषक जाति कुनबी का दर्जा दिया जाए, जिससे उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण मिल सके।
सरकारी प्रतिनिधिमंडल की बैठक
शनिवार को सरकार द्वारा नियुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से बातचीत की।
- इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे ने की।
- जरांगे ने स्पष्ट कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठों को कुनबी का दर्जा दिए बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
शासनादेश की मांग
जरांगे ने सरकार से एक शासनादेश (GR) जारी करने की मांग की है, जिसमें यह साफ लिखा हो कि कुनबी और मराठा एक ही समुदाय हैं।
- न्यायमूर्ति शिंदे वर्तमान में उस समिति के अध्यक्ष हैं, जो मराठा समुदाय के कुनबी अभिलेखों की जांच कर रही है।
- जरांगे का कहना है कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती और औपचारिक आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री से रात की बैठक
इसी मुद्दे पर शनिवार रात मंत्री विखे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।
- यह बैठक करीब एक घंटे चली।
- बैठक में भाजपा नेता गिरीश महाजन भी मौजूद थे।
- सूत्रों का कहना है कि सरकार आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने की रणनीति बना रही है।
विखे पाटिल की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उप-समिति की आज फिर से बैठक होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में जरांगे की मांगों पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न केवल महाराष्ट्र की राजनीति बल्कि सामाजिक समीकरणों पर भी बड़ा असर डालेगा।
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