समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 फरवरी 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में घोषित प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम वास्तविक निवेशकों को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि बाजार में बढ़ती सट्टेबाज़ी और अनियमित गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। एनडीटीवी प्रॉफिट कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि एसटीटी में बढ़ोतरी “निवारक उपाय” है, जो सट्टात्मक प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करेगी और कदाचार को रोकेगी।
संशोधित संरचना के तहत फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस पर प्रीमियम और एक्सरसाइज दोनों पर कर 0.10 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। इन बदलावों के बाद शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर निर्भर ब्रोकरेज फर्मों ने चिंता व्यक्त की।
वित्त मंत्री ने बाजार को लेकर निराशाजनक आकलनों को खारिज करते हुए घरेलू खुदरा निवेशकों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के धन निकासी के बावजूद बाजार की स्थिरता बनी रही, जिसका श्रेय बड़े पैमाने पर खुदरा निवेशकों की भागीदारी को जाता है। उनके अनुसार, स्थानीय निवेशकों ने अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में भी बाजार को सहारा दिया है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब तेजी से भू-राजनीतिक कारकों से प्रभावित हो रहा है। “फंड फ्लो अब भू-राजनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं,” उन्होंने कहा। ऐसे में नीति निर्माताओं को सतर्क रहने और बदलते वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप वित्तीय नीतियों को संतुलित ढंग से ढालने की आवश्यकता है।
वित्तीय क्षेत्र के व्यापक परिदृश्य पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत को बैंकिंग और वित्त के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वाकांक्षी होने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सरकार पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) की प्रवृत्तियों पर करीबी निगरानी रख रही है ताकि विकास के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन भी बना रहे।
संशोधित एसटीटी ढांचा मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों पर लेनदेन के समय लागू होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च आवृत्ति वाले और अत्यधिक सट्टात्मक ट्रेडिंग मॉडल पर इसका प्रभाव पहले दिखाई देगा। सरकार का उद्देश्य डेरिवेटिव बाजार में अत्यधिक जोखिम लेने की प्रवृत्तियों को ठंडा करना और बाजार को अधिक स्थिर व पारदर्शी बनाना है।
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