यूजीसी नए नियमों पर ब्रेक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भाजपा ने किया स्वागत

शिक्षा व्यवस्था में संतुलन की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का कदम: भाजपा

  • सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को फिलहाल लागू करने से रोका
  • भाजपा नेताओं ने फैसले को संविधान सम्मत बताया
  • सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का दावा
  • अगली सुनवाई तक पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 29 जनवरी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों और नेताओं ने अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए इसे संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप बताया है।

गिरिराज सिंह का समर्थन

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा से जुड़े ऐसे नियम, जिनसे समाज में असंतुलन पैदा होने की संभावना हो, उन पर पुनर्विचार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक मूल्यों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए।

निशिकांत दुबे का विपक्ष पर सवाल

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संसद में इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं हुई, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर सरकार को निशाना बनाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने कमजोर वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई नीतिगत फैसले लिए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

संविधान के अनुरूप व्यवस्था

निशिकांत दुबे ने भरोसा जताया कि सरकार द्वारा बनाए गए सभी कानून संविधान के दायरे में हैं। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उसी संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।

अदालत की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि नए नियमों की भाषा को लेकर दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और तब तक वर्ष 2012 के यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।

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