सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली-NCR में पुराने वाहनों पर रोक नहीं, 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल पर कार्रवाई से रोक
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 अगस्त: दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों के संचालन को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी बहस पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कर दिया कि 10 साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन स्वतः सड़क से बाहर नहीं होंगे, और इन पर कार्रवाई करने से फिलहाल रोक लगा दी गई है।
पृष्ठभूमि: पुराने वाहनों पर लगी थी पाबंदी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पहले से ही कड़े नियम लागू हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के तहत 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के पंजीकरण व उपयोग पर रोक लगाई गई थी। इसका असर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद समेत पूरे NCR में महसूस किया जा रहा था।
वाहन मालिक और ट्रांसपोर्ट यूनियन लंबे समय से इस नियम में ढील की मांग कर रहे थे, खासकर उन वाहनों के लिए जो अभी भी अच्छी स्थिति में हैं और प्रदूषण मानकों का पालन करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा —
“सिर्फ वाहन की उम्र के आधार पर उसे सड़कों से हटाना उचित नहीं है। अगर वाहन फिटनेस और प्रदूषण जांच में पास है, तो उसे चलने दिया जाना चाहिए।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वाहन मालिकों के अधिकारों की अनदेखी की जाए। कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को आदेश दिया कि केवल उम्र के आधार पर कार्रवाई न की जाए, बल्कि प्रदूषण और फिटनेस मानकों के आधार पर ही कदम उठाए जाएं।
वाहन मालिकों को मिली राहत
इस फैसले के बाद NCR में लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली है। अब तक उम्र सीमा पूरी होते ही वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया जाता था और कई मामलों में सीधे जब्ती या स्क्रैपिंग की कार्रवाई होती थी। कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे वाहन मालिक अपने वाहन की फिटनेस जांच और प्रदूषण सर्टिफिकेट के जरिए उसे कानूनी तौर पर चला सकेंगे।
सरकार और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि फिटनेस और प्रदूषण जांच की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर कोई वाहन प्रदूषण फैलाता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह नया हो या पुराना।
पर्यावरणविदों की चिंता
फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है। जहां वाहन मालिक खुश हैं, वहीं कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि दिल्ली-एनसीआर पहले ही वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, और पुराने वाहनों की वापसी से स्थिति और बिगड़ सकती है।
आगे का रास्ता
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राहत स्थायी नहीं है। सरकार को तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर ऐसा ढांचा तैयार करना होगा जिससे सड़क पर चलने वाले हर वाहन की प्रदूषण और फिटनेस स्थिति की निगरानी हो सके।
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