- सुष्मिता देव ने हाल ही में टीएमसी छोड़कर भाजपा जॉइन की, इससे पहले वे कांग्रेस में दशकों तक रहीं।
- देव का कहना—“कांग्रेस में गांधी परिवार से टकराना मतलब करियर खत्म; ऊपर वाले किसी से नाराज हुए तो आगे कोई भविष्य नहीं।”
- टीएमसी को ‘नेता-केंद्रित’ और कांग्रेस को ‘आइडियोलॉजी-बेस्ड’ पार्टी बताया; भाजपा की विचारधारा को ‘कभी समझौता न करने वाला’ कहा।
- उन्होंने कहा—भाजपा में सभी सांसदों के लिए संरक्षक मंत्री होते हैं, ज़रूरत पड़ने पर पीएम मोदी और गृह मंत्री तक पहुंच संभव।
- देव के मुताबिक—“संघ परिवार ज़मीन पर सक्रिय रहता है, इसलिए पार्टी नेतृत्व से संवाद और समस्याएं उठाने की व्यापक व्यवस्था है।”
- कांग्रेस में चुनावों के बाद समीक्षात्मक बैठकें होती हैं, लेकिन अमल में आंतरिक सहमति की कमी; टीएमसी में शक्ति एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित।
- सुष्मिता देव ने भाजपा की वोटिंग पूरी तरह विचारधारा-आधारित बताई, जबकि कांग्रेस या टीएमसी में ऐसा नहीं।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 4 अगस्त :राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।उन्होंने भाजपा को विचारधारा-आधारित पार्टी बताते हुए कहा कि यहां सांसदों के लिए संवाद और अपनी बात रखने की ज़्यादा स्वतंत्रता है, और संघ परिवार हमेशा जमीनी स्तर पर सक्रिय रहता है।
देव ने कहा, “कांग्रेस में कोई गांधी परिवार के खिलाफ बोले तो उसका करियर वहीं खत्म समझिए, जबकि भाजपा में संवाद और संगठनात्मक मजबूती ज़्यादा महसूस होती है।”
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