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जीवन मूल्य

बिना सनातन संस्कृति के भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती

✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल वर्तमान में अलग अलग तौर तरीकों से सनातन संस्कृति के विरुद्ध तरह तरह के दुष्चक्र चलाए जा रहे हैं। दुष्चक्र के ये अभियान वे लोग चलाते हैं जिन्होंने भारत को गहराई से नहीं जाना अथवा वे भारतीयता के विरोधी हैं। ऐसे लोग…

शिक्षक : बदलते समय में बदलते अर्थ

डॉ. विनय कुमार वर्मा मनुष्य जब इस पृथ्वी पर आया, तब उसके पास न विद्यालय थे, न विश्वविद्यालय, न पाठ्यपुस्तकें और न ही डिग्रियाँ। फिर भी वह सीखता था। प्रकृति उसकी पहली पाठशाला थी, अनुभव उसकी पहली पुस्तक और जीवन उसका पहला शिक्षक। धीरे-धीरे…