भाव की नगरी बनाम परित्यक्ताओं की नगरी
अंशु सारडा'अन्वि'।
मेरी वृंदावन की यात्रा मात्र 2 दिन की थी पर वह अभी तक मेरे जेहन से बाहर नहीं निकल पा रही है। मंदिरों के अतिरिक्त वहां के शैतान बंदरों द्वारा चश्मा, मोबाइल, पर्स बिना किसी भय के ले जाना और फ्रूटी देने पर उसे वापिस करना,…