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संस्कृति
संस्कृति-राष्ट्रीय संगोष्ठी : भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति
संस्कृति-राष्ट्रीय संगोष्ठी : भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति
संस्कृति–पर्यूषण पर्व: मिच्छामि दुक्कडम
संस्कृति–पर्यूषण पर्व: मिच्छामि दुक्कडम
संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी: भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति
संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी: भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति
संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी – भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति (8)
सभ्यता अध्ययन केंद्र, जन जातीयकार्य मंत्रालय, भारत सरकार और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त आयोजन दो दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 7 अगस्त 2022 को संगोष्ठी की मुख्य अतिथि थी जन जातीयकार्य राज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता। मंच पर विराजमान…
संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी – भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति (7)
दूसरे दिन 7 अगस्त को कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत से पहले स्टेज पर रेखा बहन आदिवासी परंपरा के कुछ भजन सुना रही थी। वे अपनी प्रस्तुति से पहले भजन का भाव भी बता रही थी। जैसे-ब्याह कारिज में सबसे पहले गणपति को आमंत्रित किया जाता है।
शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तीन प्रमुख आधार हैं- अमित शाह
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी वर्ष समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री…
संस्कृति- गोत्र, प्रवर, वेद आदि
वैदिक संस्कृति में व्यक्ति की पहचान के लिए गोत्र, प्रवर, देवता, वेद, शाखा और सूत्र का ज्ञान होना आवश्यक था ताकि उसके मूल का पता चल जाए और उचित पहचान स्थापित की जा सके। उच्च वर्ग में इन सभी का उपयोग धार्मिक कार्यों में संकल्प के समय किया…
संस्कृति- परंपराओं के नैरेटिव का रत्ना शाह फंडा
इसी सप्ताह नागपंचमी का त्यौहार मनाया गया। सनातन संस्कृति को मानने वाले अनेक लोगों ने सर्पों की पूजा की, सांपों को दूध पिलाया। कहीं प्रतीकात्मक और कहीं वास्तविक। सावन में शिवजी का जलाभिषेक हो रहा है,, आनेवाले दिनों में रक्षा बंधन, हर छठ,…
संस्कृति- चातुर्मास: पार्थसारथि थपलियाल
भारत देवभूमि है। इस देवभूमि में सनातन संस्कृति के अनुसार जीवन जीने की परंपरा रही है। गाँव मे जनसामान्य भी जानता है कि चौमासे में हमारी जीवनशैली क्या होनी चाहिए। खान पान में कई भोज्य निषेध हैं कई ग्राह्य हैं।