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सामाजिक ताना-बाना

भारतीय समावेशी समाज पर आधुनिकता की काली छाया

✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल माना कि परिवर्तन अवश्यंभावी है, नदी के पानी में नहाते हुए स्पर्श होते ही पानी वही नहीं रह जाता जिसने अभी स्पर्श किया था। यह प्रवाह का परिवर्तन है। तालाब के पानी में ऐसा परिवर्तन नहीं होता। एक परिवर्तन बाँध वाले पानी…

पीढ़ियों के फासले में संवाद की जरूरत

डॉ. प्रियदर्शिनी पुरोहित परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इस नियम के अनुसार वीडियो की सोच में बदलाव भी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, परंतु आज की युवा पीढ़ी में परिवर्तन के रूप में संस्कारों और जीवन-मूल्यों में गिरावट आज हमारे देश के…