किसानों पर जुल्म,पूंजीपतियों पर करम..
इंद्र वशिष्ठ
खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर कटता खरबूजा ही है इसी तरह वोट किसी भी दल को देंं पिसती जनता ही है। सभी दल और नेता एक जैसे ही है जनता के पास कोई विकल्प ही नहीं है। ऐसे में जनता के लिए एक तरफ़ खाई और दूसरी तरफ़ कुंआ ही है।…