Browsing Tag

पितृसत्ता और भाषा

असहज करने वाली गालियों पर हम कितने सहज है

विजय पाल सिंह ​जब एक आम आदमी किसी परिस्थिति में झुझलाता है, उकसाहट में आता है, कारण कुछ भी हो सकता है, किसी बहस में आपा खोता है, तो जुबान के सिरे पर सबसे पहले क्या आता है? कोई नसीहत का शब्द नहीं बल्कि एक गाली। वह गाली किसी विचार, किसी…