Browsing Tag

जीवन दर्शन

एक सिनेमैटिक हिंदी इमेज

विजय पाल सिंह ​हम अक्सर एक ही जगह होते हैं, एक ही विषय पर बात कर रहे होते हैं, फिर भी बात नहीं बनती। धीरे-धीरे शब्द कम होने लगते हैं, आवाज़ मद्धम पड़ जाती है, और अंत में एक वाक्य हवा में तैर जाता है—"चलो छोड़ो, जाने दो।" हम इसे समझदारी…

‘शिक्षा इस मायने में एक निवेश है कि शिक्षित व्यक्ति समाज की बेहतर सेवा करेगा’-…

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को नई दिल्ली में 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय - जीवन दर्शन और समसामयिकता' (पांच खंड) पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने आज के समय में पंडित दीनदयाल के विचारों का महत्व समझाया।