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पाश्चत्य कहानी

क्या नैतिकता और अश्लीलता एक हैं या ??

माही अग्रवाल मैं नहीं जानती! क्योंकि, जब से मैं पूरी तरह होश में जी रही हूँ तब से मैं हर पल इस एहसास में हूँ कि जिसे हम जीवन कहते हैं- जीवन अर्थात बचपन से बुढ़ापा नहीं बल्कि जब तक सांसे चल रही हैं तभी तक! किसी भी क्षण अगर सांसो की यह डोर…