तमिलनाडु स्पीकर के एंटी-अबॉर्शन मार्च में शामिल होने पर विवाद

  • तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने चेन्नई में आयोजित 5वें ‘नेशनल मार्च फॉर लाइफ’ एंटी-अबॉर्शन रैली में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
  • प्रभाकर ने कार्यक्रम में कहा—”जीवन का आरंभ गर्भाधान से होता है, हर अजन्मे बच्चे की गरिमा है, और यह ईश्वर का आशीर्वाद है।”
  • रैली में MTP एक्ट की आलोचना की गई, 5,000 से अधिक लोगों ने गर्भपात के विरोध में भाग लिया।
  • महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने स्पीकर के बयान और उपस्थिति पर तीखी आपत्ति जताई, संविधान में सुरक्षित महिला अधिकारों का हवाला दिया।
  • सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले का भी उल्लेख, जिसमें महिलाओं के लिए सुरक्षित गर्भपात को मौलिक अधिकार माना गया है।
  • स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने बयान से दूरी बनाई, कहा—”MTP एक्ट के तहत 20 हफ्ते तक गर्भपात कानूनी है, कई मामलों में यह मेडिकल आवश्यकता है।”
  • भाजपा नेता नारायणन थिरुपथी ने भी स्पीकर की उपस्थिति को विवादास्पद बताया।

समग्र समाचार सेवा 

चेन्नई, 11 अगस्त :तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर द्वारा चेन्नई में आयोजित एंटी-अबॉर्शन रैली में भाग लेने और गर्भाधान से जीवन शुरू होने संबंधी बयान देने पर विवाद खड़ा हो गया है। रैली में 5,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जहां MTP एक्ट और गर्भपात अधिकारों का विरोध हुआ। महिला अधिकार समूहों और विपक्षी नेताओं ने इसे महिला अधिकारों के खिलाफ बताया और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित गर्भपात के अधिकार की याद दिलाई।महिला कार्यकर्ता शालिन मारिया लॉरेंस ने पूछा—”क्या मुख्यमंत्री भी इस विचार से सहमत हैं?” बीजेपी नेता ने भी कहा—”स्पीकर का यह कदम महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है।” राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा—”गर्भपात पर कानून स्पष्ट है, और स्पीकर के विचार व्यक्तिगत हैं।” इस विवाद ने राज्य में प्रजनन अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

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