समग्र समाचार सेवा
न्यूयॉर्क, 22 सितंबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में जारी किए गए H-1B वीज़ा से जुड़े आदेश ने भारतीय पेशेवरों और टेक उद्योग में गहरी चिंता पैदा कर दी थी। लेकिन रविवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि नए नियम केवल 21 सितंबर 2025 के बाद दाखिल की गई नई H-1B वीज़ा याचिकाओं पर लागू होंगे। पहले से जारी वीज़ा या पहले दाखिल याचिकाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मौजूदा वीज़ा धारकों को राहत
विदेश विभाग के अनुसार, यह आदेश न तो पहले से जारी वीज़ा को प्रभावित करेगा और न ही पहले से स्वीकृत याचिकाओं को। इसका मतलब है कि अमेरिका में पहले से कार्यरत भारतीय आईटी पेशेवर या अन्य H-1B वीज़ा धारक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी नौकरी जारी रख सकते हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने एएनआई से बातचीत में कहा, “जो लोग भारत या अन्य देशों की यात्रा पर गए हैं, उन्हें जल्दबाज़ी में लौटने की आवश्यकता नहीं है। $100,000 की नई फीस केवल नई याचिकाओं पर लागू होगी, मौजूदा धारकों पर नहीं।”
$100,000 फीस केवल नए आवेदकों पर
विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि हर नई याचिका या 2026 की लॉटरी प्रणाली में भाग लेने वाले आवेदकों को अब $100,000 (करीब 83 लाख रुपये) का शुल्क देना होगा। यह राशि एकमुश्त (one-time) शुल्क है, न कि हर साल भरने वाला वार्षिक शुल्क।
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा, “स्पष्ट कर दूं: यह कोई वार्षिक शुल्क नहीं है। यह केवल एक बार लगने वाली फीस है और सिर्फ नई याचिकाओं पर लागू होगी। मौजूदा वीज़ा धारकों और नवीनीकरण (renewals) पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”
USCIS और अन्य एजेंसियों की तैयारी
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS), कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन और स्टेट डिपार्टमेंट ने इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। USCIS के निदेशक जोसेफ बी. एडलो ने भी मेमोरेंडम जारी कर कहा कि यह आदेश केवल उन याचिकाओं पर लागू होगा जो 21 सितंबर के बाद दाखिल होंगी।
आगे और भी सुधारों की योजना
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में H-1B वीज़ा से जुड़े और भी सुधार किए जाएंगे। इनमें मजदूरी स्तर बढ़ाने (prevailing wage levels) का प्रस्ताव और H-1B लॉटरी में उच्च वेतन वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने की योजना शामिल है।
इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका में उच्च कौशल वाले और उच्च वेतन वाले विदेशी पेशेवरों को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भारतीय समुदाय की नजरें टिकीं
H-1B वीज़ा भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए लंबे समय से रोजगार का प्रमुख मार्ग रहा है। अमेरिका में लाखों भारतीय इस वीज़ा पर काम कर रहे हैं। नए नियमों से भविष्य में वीज़ा हासिल करना कठिन और महंगा हो सकता है, लेकिन मौजूदा धारकों के लिए राहत की बात यह है कि उनके रोजगार और यात्रा अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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