ट्रंप का बयान: “सात वैश्विक संघर्ष सुलझाए, नोबेल न मिला तो अमेरिका के लिए होगा बड़ा अपमान”

समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन, 1 अक्टूबर: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अब तक सात वैश्विक संघर्षों को समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाई है और अगर इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया जाता, तो यह अमेरिका के लिए “बड़े अपमान” की बात होगी।

क्वांटिको में सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा,
“हमने गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की योजना तैयार की है। अब यह हमास पर निर्भर करता है कि वह मानता है या नहीं। अगर वे सहमत नहीं होते, तो उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। सभी अरब और मुस्लिम राष्ट्र इस योजना से सहमत हैं और इजराइल ने भी हां कह दिया है। यह वास्तव में अद्भुत है कि सभी देश एक साथ आए।”

गाजा संघर्ष और “आठवीं सफलता”

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब होती है, तो वह कुछ ही महीनों में आठ वैश्विक संघर्षों को सुलझा चुके होंगे। उन्होंने कहा,
“यह शानदार है। कोई भी ऐसा पहले कभी नहीं कर पाया। लेकिन सवाल यह है – क्या मुझे नोबेल पुरस्कार मिलेगा? बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ नहीं किया, बल्कि केवल एक किताब लिखी होगी जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के विचार और युद्ध सुलझाने की रणनीति होगी। हां, पुरस्कार किसी लेखक को मिल जाएगा।”

“नोबेल देश को मिलना चाहिए” – ट्रंप

ट्रंप ने इस मुद्दे को “राष्ट्रीय सम्मान” से जोड़ते हुए कहा कि यह उपलब्धि अमेरिका के नाम होनी चाहिए। उन्होंने कहा,
“यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी अगर इस काम को मान्यता न मिले। मैं यह सम्मान अपने लिए नहीं चाहता। यह पुरस्कार अमेरिका को मिलना चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ।”

उन्होंने आगे कहा कि वे इस बात को हल्के में नहीं कह रहे हैं, बल्कि उन्हें समझौतों की कला की गहरी समझ है।
“आठ समझौते करना वास्तव में सम्मान की बात है। यह दुनिया के इतिहास में एक अनोखी उपलब्धि है।”

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ट्रंप का बयान

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा संघर्ष और भारत-पाक विवाद को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल जारी है। ट्रंप पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि, भारत ने इस दावे को हमेशा खारिज किया है।

ट्रंप की बयानबाजी से स्पष्ट है कि वे नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर लगातार दबाव बनाना चाहते हैं और इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में भुनाना चाहते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की साख और राजनीति को चर्चा में ले आया है। जहां ट्रंप अपनी मध्यस्थता को “ऐतिहासिक उपलब्धि” बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का मानना है कि वे इसे चुनावी नैरेटिव बनाने की कोशिश कर र

 

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