समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 अगस्त: बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) का पहला ड्राफ्ट जारी होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही दिख रही है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं और राजनीतिक दलों को 1 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया है। इसके बावजूद, पहले सात दिनों में अब तक सिर्फ 5015 आवेदन आए हैं, और हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस और आरजेडी (RJD) की ओर से एक भी औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
तेजस्वी के दावे बनाम हकीकत
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव रोज मीडिया के सामने आरोप लगा रहे हैं कि बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब हैं। विधानसभा के मानसून सत्र से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। कई बार सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई।
लेकिन आयोग के आंकड़े बताते हैं कि विपक्ष के दावों के बावजूद, अब तक किसी बड़े राजनीतिक दल ने आधिकारिक तौर पर आवेदन जमा नहीं किया। इससे सरकार और एनडीए (NDA) को विपक्ष को घेरने का मौका मिल गया है।
SIR ड्राफ्ट पर सीमित प्रतिक्रिया
मतदाता सूची में नाम कटने, गलत नाम या नए नाम जोड़ने जैसी गड़बड़ियों के सुधार के लिए आयोग ने पूरा मौका दिया है। लेकिन 7 दिन बीतने के बाद भी राजनीतिक दलों की सक्रियता नदारद है।
सरकार का कहना है कि SIR एक सामान्य प्रक्रिया है, और अगर कोई त्रुटि है तो बीएलओ (BLO) के माध्यम से उसका समाधान किया जा सकता है। वहीं, विपक्षी नेता सड़क से संसद तक तो सक्रिय हैं, लेकिन मैदान में उनकी निष्क्रियता सवाल खड़े कर रही है।
राजनीतिक सियासत का केंद्र
इस मुद्दे पर एनडीए ने कांग्रेस और आरजेडी पर सीधा हमला बोला है। उनका कहना है कि विपक्ष सिर्फ बयानबाजी कर रहा है और मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर विपक्ष अपने ही दावों पर कार्रवाई नहीं करता, तो यह 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उनकी साख को नुकसान पहुंचा सकता है।
आगे की राह
1 सितंबर तक का समय अभी बाकी है, लेकिन शुरुआती रुझान बताते हैं कि विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर जमीन पर ज्यादा मेहनत करनी होगी, वरना यह उनके लिए राजनीतिक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।
Comments are closed.