श्री अमित शाह ने पंचकूला में वीर बाल दिवस पर हरियाणा सरकार के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया

मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘वीर बाल दिवस’ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के बच्चों को मातृभूमि के लिए त्याग और साहस की प्रेरणा देता है

  • वीर साहिबज़ादों की शहादत आज भी रोंगटे खड़े कर देती है: अमित शाह
  • गुरु गोबिंद सिंह जी जैसा ‘सरबंसदानी’ विश्व इतिहास में अद्वितीय
  • वीर बाल दिवस के माध्यम से साहिबज़ादों का बलिदान नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा
  • सिख इतिहास और विरासत को सम्मान दिलाने में मोदी सरकार की अहम भूमिका

समग्र समाचार सेवा
पंचकूला | 25 दिसंबर: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के पंचकूला में वीर बाल दिवस के अवसर पर हरियाणा सरकार के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

वीर साहिबज़ादों की शहादत पर गर्व और पीड़ा

अमित शाह ने कहा कि वीर साहिबज़ादों की शहादत का स्मरण करते ही मन पीड़ा से भर उठता है, लेकिन साथ ही गर्व भी होता है कि यह वही देश है जहाँ एक पिता अपने चारों पुत्रों को धर्म और राष्ट्र के लिए समर्पित कर देता है। यह बलिदान आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।

दशम पिता और साहिबज़ादों का बलिदान—राष्ट्रीय दायित्व

उन्होंने कहा कि दशम पिता गुरु गोबिंद सिंह के जीवन और वीर साहिबज़ादों की शहादत को देश के हर युवा तक पहुँचाना हम सभी का राष्ट्रीय दायित्व है। विश्व इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता, जहाँ किसी ने पिता, माता और चार पुत्रों का बलिदान धर्म और देश के लिए दिया हो। इसी कारण उन्हें ‘सरबंसदानी’ कहा गया।

सिख गुरुओं की परंपरा और राष्ट्र रक्षा

गृह मंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव से लेकर दशम गुरु तक अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष चलता रहा। गुरु नानक देव जी ने देश को एकता के सूत्र में बाँधा और समाज को अंधविश्वास से मुक्त होने की दिशा दी। गुरु अंगद देव जी ने गुरुमुखी लिपि में उपदेशों को संकलित किया। गुरु अमर दास जी ने लंगर और मातृ सम्मान का संदेश दिया। गुरु अर्जन देव जी ने आदिग्रंथ का संपादन कर सभी संतों की वाणी को एक ग्रंथ में संजोया।


मिरी–पिरी और सेवा की परंपरा

छठे गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने मिरी और पिरी की परिकल्पना प्रस्तुत की। दीपावली के दिन 52 राजाओं को मुक्त कराने के कारण ‘बंदी छोड़ दिवस’ की परंपरा बनी। गुरु हर राय जी और गुरु हर किशन साहिब जी ने करुणा, प्रकृति और सेवा की मिसाल कायम की।

‘हिंद दी चादर’ गुरु तेग बहादुर

अमित शाह ने कहा कि यदि गुरु तेग बहादुर न होते तो न हिंदू बचते, न सिख। उनके अद्वितीय बलिदान के कारण ही उन्हें ‘हिंद दी चादर’ कहा जाता है। दिल्ली का शीशगंज गुरुद्वारा आज भी देशभक्तों के लिए तीर्थस्थल बना हुआ है।

गुरु गोबिंद सिंह—युगपुरुष

अनेक भाषाओं के ज्ञाता, कवि और महान योद्धा गुरु गोबिंद सिंह जी को अमित शाह ने युगपुरुष बताया। उन्होंने कहा कि दशम पिता का वाक्य—“चार मुए तो क्या हुआ, जीवित कई हजार”—आज भी राष्ट्र और धर्म के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणा देता है।


वीर बाल दिवस और सरकार की पहल

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद इस गौरवशाली इतिहास को भुला दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित कर साहिबज़ादों के बलिदान को सम्मान दिया। आज देशभर के विद्यालयों में इस दिन उनकी जीवनगाथा पढ़ाई जाती है।

सिख विरासत को सम्मान

अमित शाह ने कहा कि करतारपुर साहिब गलियारा, जलियांवाला बाग स्मारक का निर्माण, सिख दंगों के दोषियों को दंड और सिख शरणार्थियों को नागरिकता देना, ये सभी कदम सिख इतिहास और सर्वधर्म समभाव के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।

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