वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई, दुनिया दो खेमों में बंटी
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया, समर्थन और विरोध में देशों की खुली लामबंदी
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अमेरिकी कार्रवाई को कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया
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फ्रांस, ब्रिटेन सहित कुछ देशों ने अमेरिका का समर्थन किया
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भारत ने संयम और संवाद से समाधान की अपील की
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इटली और ऑस्ट्रेलिया ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 5 जनवरी: वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को लेकर वैश्विक राजनीति में तीखा विभाजन सामने आया है। एक ओर जहां कई देश इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राष्ट्र अमेरिका के रुख के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया और यूरोप तक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।
अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना करने वाले देश
रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देशों ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है। इन देशों का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और किसी भी संप्रभु देश की अखंडता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अमेरिका के समर्थन में खड़े देश
दूसरी ओर अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन किया है। इन देशों का तर्क है कि वेनेजुएला में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सख्त रुख अपनाना चाहिए।
भारत का संतुलित रुख
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयमित और संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। मंत्रालय ने कहा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई को लेकर प्रतिबद्ध है तथा काराकास स्थित भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के संपर्क में है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का बयान
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि इटली ने कभी भी मादुरो की स्वयं घोषित चुनावी जीत को मान्यता नहीं दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप सही रास्ता नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में हाइब्रिड खतरों के खिलाफ कार्रवाई को सरकार उचित मानती है। साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला में रह रहे इतालवी नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
ऑस्ट्रेलिया ने कूटनीति पर दिया जोर
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार वेनेजुएला की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया। साथ ही, वेनेजुएला में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए आपातकालीन सहायता नंबर भी साझा किए गए।
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