AMU छात्रसंघ चुनाव में नारेबाजी पर VHP का कड़ा प्रहार
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में शर्जील इमाम और उमर खालिद के समर्थन में लगे नारों को बताया शर्मनाक, प्रशासन से की कड़ी कार्रवाई की मांग।
- आठ साल बाद हो रहे AMU छात्रसंघ चुनाव में लगे विवादित नारे।
- वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने एएमयू प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल।
- विवादित नारे लगाने वाले प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करने की मांग।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 05 नवंबर: आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University – AMU) में आयोजित हो रहे छात्रसंघ चुनावों के दौरान परिसर का माहौल एक बार फिर गरमा गया है। चुनाव प्रचार के दौरान अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सहित कुछ छात्र नेताओं द्वारा कथित तौर पर शर्जील इमाम और उमर खालिद जैसे जेल में बंद विवादित आंकड़ों के समर्थन में नारेबाजी करने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बेहद कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और शर्मनाक करार दिया है।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस पूरे वाकये की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए इसे शिक्षा के मंदिर में देशविरोधी और उग्रवादी मानसिकता को बढ़ावा देने का प्रयास बताया है। उन्होंने इस विषय को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और व्यवस्था पर कई तीखे सवाल दागे हैं।
चयनात्मक संवेदनाओं पर वीएचपी ने उठाए गंभीर सवाल
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि परिसर में गाज़ा और फ़िलिस्तीन के समर्थन में तो बढ़-चढ़कर नारे लगाए जा रहे हैं, लेकिन यही कथित छात्र नेता सऊदी अरब पर लगातार हमले करने वाले हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के खिलाफ एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने इस ‘चयनात्मक संवेदना’ (Selective Empathy) पर सवाल उठाते हुए कहा कि सऊदी अरब में ही इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना स्थित हैं। हूतियों द्वारा किए गए लगातार हमलों और गोलाबारी में भारत समेत कई अन्य देशों से गए बेकसूर जायरीनों (तीर्थयात्रियों) की भी जान गई है। इसके बावजूद इन हमलों पर मौन साधे रहना और केवल चुनिंदा मुद्दों पर ही आक्रोश जताना इन छात्र नेताओं की दोहरी मानसिकता और भ्रामक सोच को उजागर करता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष दागे गए 4 तीखे सवाल
एएमयू परिसर के भीतर इस प्रकार की नारेबाजी और विवादित तत्वों के महिमामंडन को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है। विनोद बंसल ने सीधे तौर पर एएमयू प्रशासन के सामने चार प्रमुख सवाल खड़े किए हैं:
स्वीकार्यता पर सवाल: क्या एएमयू विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ऐसे विवादित नारे लगाना और देश विरोधी मामलों में बंद तत्वों का महिमामंडन करना प्रशासन को स्वीकार्य है?
निष्पक्ष जांच की मांग: क्या एएमयू प्रशासन इस पूरे प्रकरण, वीडियो फुटेज और चुनावी अभियानों की तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष जांच कराएगा?
प्रत्याशियों की अयोग्यता: क्या ऐसे देशविरोधी और असंवैधानिक नारे लगाने वाले प्रत्याशियों को चल रहे छात्रसंघ चुनाव से तुरंत अयोग्य (Disqualify) घोषित किया जाएगा?
स्थायी प्रतिबंध: क्या भविष्य में भी ऐसी अवांछित और माहौल खराब करने वाली गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले छात्रों को चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित (Permanently Ban) किया जाएगा?
‘शिक्षा के मंदिर में नहीं होनी चाहिए कट्टरता की जगह’
अपने बयान का समापन करते हुए विहिप प्रवक्ता ने कहा कि देश का कोई भी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान कट्टरता, हिंसा या आतंकवाद समर्थक मानसिकता का केंद्र नहीं बनना चाहिए। उच्च शिक्षण संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और राष्ट्रीय एकता के केंद्र होने चाहिए।
उन्होंने एएमयू प्रशासन और स्थानीय कानून-व्यवस्था तंत्र से अपील की है कि वे ऐसे असामाजिक तत्वों और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले छात्र नेताओं के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के तत्काल कठोरतम कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई (Strict Disciplinary Action) सुनिश्चित करें, ताकि परिसर का माहौल और देश की अखंडता सुरक्षित रह सके।
निष्कर्ष
AMU छात्रसंघ चुनाव के दौरान सामने आई इस नारेबाजी और उस पर वीएचपी की कड़ी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर परिसरों के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के दायरों को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन सवालों पर क्या कदम उठाता है और विवादित नारेबाजी में शामिल प्रत्याशियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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