उच्च शिक्षा और अनुसंधान में निरंतर निवेश जरूरी: उपराष्ट्रपति

कोच्चि में राजगिरी इंजीनियरिंग कॉलेज के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अनुसंधान और कौशल विकास पर जोर दिया।

  • कोच्चि में आयोजित राजगिरी इंजीनियरिंग कॉलेज के रजत जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भाग लिया।
  • उन्होंने इस दौरान ‘कॉनफ्लुएंस 3.0’ (Confluence 3.0) सम्मेलन का उद्घाटन किया, जो उद्योग और शिक्षा जगत के बीच समन्वय पर केंद्रित है।
  • उपराष्ट्रपति ने युवाओं से ड्रग्स से दूर रहने की अपील करते हुए शिक्षा को केवल डिग्रियों तक सीमित न रखने की बात कही।

कोच्चि, 1 सितंबर: देश के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कोच्चि में आयोजित राजगिरी इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (Rajagiri School of Engineering and Technology) के रजत जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उन्होंने संस्थान की अब तक की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि इसकी प्रगति उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर किए जाने वाले निवेश के महत्व को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव” विषय पर आधारित उद्योग-शिक्षा सम्मेलन ‘कॉनफ्लुएंस 3.0’ का औपचारिक उद्घाटन भी किया।

शिक्षा को डिग्रियों तक सीमित न रखें

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में केवल किताबी ज्ञान या पारंपरिक डिग्रियां प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थानों को केवल डिग्रीधारक युवा तैयार करने की मशीन नहीं बनना चाहिए, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार की वास्तविक मांगों और उद्योग जगत की जरूरतों को बारीकी से समझना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने आह्वान किया कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख तकनीकी और स्टार्टअप हब बनाने के लिए अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच का समन्वय और अधिक मजबूत होना चाहिए।

केरल की उपलब्धियां और भविष्य की दिशा

केरल राज्य की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में इस राज्य ने हमेशा से ही देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि राजगिरी जैसी संस्थाओं ने न केवल तकनीकी रूप से दक्ष कुशल पेशेवर तैयार किए हैं, बल्कि समाज और सार्वजनिक जीवन को दिशा देने वाले कुशल नेतृत्वकर्ता भी दिए हैं। उन्होंने संस्थानों से अनुसंधान-उन्मुख उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और एक ऐसा मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का आग्रह किया जो नई सोच और रचनात्मकता को पोषित कर सके।

युवाओं से ‘ड्रग्स को कहें ना’ की अपील

अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्रपति ने देश की युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए एक गंभीर और बेहद प्रभावशाली संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में ‘ड्रग्स को स्पष्ट रूप से ना कहें’ (Say No to Drugs)। अपने बचपन के दिनों की एक सीख को साझा करते हुए उन्होंने समझाया कि क्षणिक और तात्कालिक सुख-सुविधाएं इंसान के बड़े सपनों और लक्ष्यों को पलभर में नष्ट कर सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमताओं का उपयोग अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए करें। इस अवसर पर केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, केरल के विधायक/नेता श्री वी. डी. सतीसन और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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