विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी छलांग, एक हफ्ते में 14 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701 अरब डॉलर के पार
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एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 14.17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
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कुल भंडार बढ़कर 701.36 अरब डॉलर पहुँचा
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विदेशी मुद्रा संपत्तियों और सोने के भंडार में मजबूती
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विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष हिस्सेदारी में हल्की कमी
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 24 जनवरी: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 16 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.17 अरब डॉलर बढ़कर 701.36 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भंडार में अपेक्षाकृत मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
विदेशी मुद्रा संपत्तियों में बढ़ा भरोसा
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा संपत्तियों में इस सप्ताह 9.65 अरब डॉलर का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 560.52 अरब डॉलर हो गईं। इसमें वैश्विक मुद्रा बाजार में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख मुद्राओं के मूल्य में हुए बदलाव का भी असर शामिल है।
रिकॉर्ड स्तर के आसपास बना हुआ है भंडार
बीते वर्ष सितंबर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने अब तक के उच्चतम स्तर 704.89 अरब डॉलर तक पहुँच गया था। हाल के महीनों में रुपये पर दबाव बढ़ने के बावजूद रिजर्व बैंक की सतर्क नीति के चलते भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय इजाफा
इस दौरान देश के सोने के भंडार में 4.62 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 117.45 अरब डॉलर हो गया। यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को दर्शाती है।
अन्य घटकों में हल्की गिरावट
विशेष आहरण अधिकार में 3.5 करोड़ डॉलर की मामूली कमी आई है, जिससे यह घटकर 18.70 अरब डॉलर रह गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत की आरक्षित स्थिति भी 7.3 करोड़ डॉलर घटकर 4.68 अरब डॉलर पर पहुँच गई।
रुपये की स्थिरता पर नजर बनाए हुए है रिजर्व बैंक
रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। जरूरत पड़ने पर बैंक बाजार में हस्तक्षेप करता है ताकि रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके। इन कदमों का उद्देश्य किसी निश्चित विनिमय दर को बनाए रखना नहीं, बल्कि बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करना होता है।
बाजार धारणा पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में इस तरह की मजबूत बढ़ोतरी से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। इससे आने वाले समय में पूंजी बाजार की धारणा पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
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