‘विकसित भारत 2047’ के लिए रणनीतिक प्रबंधन और नवोचार

आईआरएस अधिकारी अजय केसरी ने देश के विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आधुनिक प्रशासन और तकनीकी बदलावों को जरूरी बताया।

  • ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने के लिए प्रशासनिक सुधार, रणनीतिक प्रबंधन और नवोचार (Innovation) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
  • प्रतिष्ठित आईआरएस अधिकारी अजय केसरी ने अपने हालिया संबोधन में देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नए प्रशासनिक रोडमैप पर जोर दिया है।
  • सरकारी प्रणालियों में तकनीकी एकीकरण और कार्यकुशलता बढ़ाकर भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 24 सितंबर: भारत जब स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने यानी वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य (Viksit Bharat 2047) की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब इस महाअभियान को सफल बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों, रणनीतिकारों और नवोचार (Innovation) की भूमिका सबसे अहम हो गई है। हाल ही में इस दिशा में चर्चा करते हुए वरिष्ठ आईआरएस (IRS) अधिकारी अजय केसरी ने इस बात पर जोर दिया कि देश के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प के लिए केवल नीतियों का होना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका सटीक क्रियान्वयन और रणनीतिक प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। सरकारी प्रणालियों में पारदर्शिता लाने और प्रशासनिक मशीनरी को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए नए तौर-तरीके अपनाने की जरूरत है।

प्रशासनिक सुधार और सुशासन की नई दिशा

आधुनिक दौर में किसी भी देश की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वहां की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी लचीली, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख (Result-oriented) है। अजय केसरी के अनुसार, ‘विकसित भारत’ के सपने को मूर्त रूप देने के लिए हमें अपनी पुरानी कार्यसंस्कृति से बाहर निकलकर डिजिटल गवर्नेंस और डेटा-संचालित निर्णय लेने की प्रक्रिया को अपनाना होगा। कर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और लोक कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचता है।

युवा शक्ति और स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका

देश के विकास में केवल सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र, युवाओं और स्टार्टअप्स की भागीदारी भी उतनी ही अनिवार्य है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। ऐसे में रणनीतिक प्रबंधन के तहत यह जरूरी है कि सरकारी नीतियां ऐसी हों जो नवाचार को बढ़ावा दें और युवाओं को अपने विचारों को उद्यम में बदलने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करें। कौशल विकास, अनुसंधान (Research & Development) और मेक इन इंडिया जैसी पहलों को जब प्रशासनिक सहयोग मिलता है, तो देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर होता है।

भविष्य की चुनौतियां और समाधान का मार्ग

वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाएं बनानी होंगी। बुनियादी ढांचे का विकास, हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रशासनिक नेतृत्व और जन-सहयोग के समन्वय से ही हम 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

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