समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पर अपना अंतरिम फैसला सुनाया। अदालत ने कानून पर पूर्ण रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन कुछ धाराओं पर अस्थायी रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून की संवैधानिकता की धारणा उसके पक्ष में होती है, लेकिन कुछ प्रावधानों पर अंतरिम संरक्षण ज़रूरी है।
सुबह अदालत में फैसला सुनाए जाने के बाद मुस्लिम संगठन और उलेमा इसे राहत और जीत मानकर जश्न मना रहे थे। जमीयत उलमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी से लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शिया मौलाना कल्बे जवाद तक सभी ने फैसले का स्वागत किया। लेकिन शाम को जब 128 पन्नों का पूरा आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ, तो तस्वीर बदल गई।
फैसले की जटिलता और भ्रम
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील एम.आर. शमशाद ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि अदालत ने कलेक्टर की शक्तियों पर रोक लगा दी है, लेकिन पूरे आदेश को पढ़ने के बाद स्पष्ट हुआ कि कई बिंदु मुस्लिम पक्ष के लिए चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि एएसआई सर्वेक्षण पर कोई रोक नहीं है। अगर वक्फ संपत्ति को गैर-वक्फ घोषित किया जाता है, तो स्वामित्व का हस्तांतरण गंभीर चिंता का विषय होगा। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा कि वक्फ संपत्तियों पर परिसीमा अधिनियम लागू नहीं होगा, यानी एक बार संपत्ति वक्फ हो जाने पर कब्ज़ा होने की स्थिति में 12 साल के भीतर भी कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी।
ओवैसी का बयान और सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पहले तो फैसले का स्वागत किया, लेकिन बाद में पूरा आदेश पढ़ने के बाद कहा कि यह निर्णय वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा नहीं करता। उनके अनुसार, इससे अतिक्रमणकारियों को फायदा मिलेगा और वक्फ की ज़मीन पर विकास कार्य रुक सकते हैं।
ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम अधिकारियों की नियुक्ति क्यों करना चाहती है। उन्होंने कहा, “अगर किसी गैर-सिख को एसजीपीसी का सदस्य बना दिया जाए, तो सिखों को कैसा लगेगा?” ओवैसी ने इसे अनुच्छेद 26 और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
राजनीतिक और सामाजिक असर
यह फैसला मुस्लिम संगठनों के लिए उलझन पैदा करने वाला साबित हुआ है। सुबह जिस आदेश को जीत मानकर पेश किया गया, शाम तक वही आदेश चिंता और असमंजस का कारण बन गया। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो वक्फ कानून के भविष्य और मुस्लिम संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर निर्णायक होगा।
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