पश्चिम बंगाल के स्कूली पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव
अफ्रीका’ की जगह ‘शिवाजी उत्सव’ और ‘सिराजदौला’ की जगह ‘मेबार पतन’
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता ,पश्चिम बंगाल,2 अक्टूबर : पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा गठित सिलेबस-कम-करिकुलम समिति ने कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित संशोधन 2 जनवरी 2027 से लागू किए जाने हैं। समिति ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को सभी पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने तथा कुछ मौजूदा अध्यायों को हटाने या संक्षिप्त करने की सिफारिश की है।
समिति के अध्यक्ष और कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी के अनुसार, सभी पाठ्यपुस्तकों की शुरुआत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान से संबंधित सामग्री शामिल की जाएगी, ताकि विद्यार्थी उनके बारे में जान सकें।
सिंगूर आंदोलन और कन्याश्री योजना के अध्याय हटाने का प्रस्ताव
समिति ने कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक से सिंगूर भूमि आंदोलन से संबंधित अध्याय हटाने का प्रस्ताव दिया है। यह आंदोलन तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुआ था और बाद की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया था।
इसी तरह कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक से कन्याश्री योजना से संबंधित अध्याय हटाने की सिफारिश की गई है। ये दोनों विषय पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पाठ्यक्रम में शामिल किए गए थे।
‘अफ्रीका’ की जगह ‘शिवाजी उत्सव’
प्रस्तावित बदलावों में साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन शामिल हैं। समिति ने रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को हटाकर उनकी ही कविता ‘शिवाजी उत्सव’ शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।
टैगोर ने ‘अफ्रीका’ कविता 1937 में इथियोपिया पर बेनिटो मुसोलिनी के नेतृत्व में हुए इतालवी आक्रमण की पृष्ठभूमि में लिखी थी। कविता में पश्चिमी साम्राज्यवाद की आलोचना की गई है।
वहीं ‘शिवाजी उत्सव’ में मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के प्रति सम्मान और उनके योगदान का चित्रण किया गया है। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि जब देश ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब अपनी संस्कृति और मूल्यों को पाठ्यक्रम में प्रमुखता देना महत्वपूर्ण है।
‘सिराजदौला’ की जगह ‘मेबार पतन’
सचिंद्रनाथ सेनगुप्ता के नाटक ‘सिराजदौला’ को हटाकर द्विजेंद्रलाल राय के ‘मेबार पतन’ को शामिल करने का प्रस्ताव है।
‘सिराजदौला’ में बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब सिराज-उद-दौला की हार और उनके करीबी सहयोगियों, विशेषकर मीर जाफर और जगत सेठ से जुड़े विश्वासघात की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्रस्तुत की गई है।
दूसरी ओर, ‘मेबार पतन’ में राजस्थान के मेवाड़ पर मुगल आक्रमण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को केंद्र में रखा गया है।
साम्यवाद और मुगल काल से जुड़े हिस्से होंगे संक्षिप्त
समिति ने पाठ्यक्रम में साम्यवाद और मुगल काल से संबंधित कुछ हिस्सों को भी कम करने का प्रस्ताव दिया है। समिति के अध्यक्ष के अनुसार, इसके साथ देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले लोगों और उनके योगदान को अधिक स्थान देने की योजना है।
समिति का कहना है कि इतिहास की पुस्तकों में लंबे समय से विभिन्न शासकों और उनके परिवारों से संबंधित विवरणों पर अधिक जोर रहा है, जबकि स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन देने वाले लोगों को अपेक्षाकृत कम स्थान मिला है।
बंगाली भाषा की पुस्तकों में भी बदलाव
प्रस्तावित संशोधन केवल इतिहास और साहित्य तक सीमित नहीं हैं। बंगाली भाषा की पाठ्यपुस्तकों में रोजमर्रा के इस्तेमाल में कम प्रचलित माने जाने वाले कुछ शब्दों को हटाने या बदलने की भी सिफारिश की गई है।
समिति ने उदाहरण के तौर पर ‘पानी’ की जगह ‘जल’ तथा ‘अम्मा’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्दों से जुड़े बदलावों का उल्लेख किया है।
समिति के अनुसार, बंगाली और अंग्रेजी भाषा की कई पाठ्यपुस्तकों के संशोधित अध्याय राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजे जा चुके हैं। बाकी सामग्री भी जल्द भेजे जाने की उम्मीद है।
जुलाई 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम, सिलेबस और पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा के लिए सिलेबस-कम-करिकुलम समिति का गठन किया था। प्रस्तावित बदलावों पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी के बाद होगा।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.