गेहूं और जौ उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, लागत घटाना भी जरूरी: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

समग्र समाचार सेवा
ग्वालियर, 27 अगस्त: भारत की कृषि नीति को और मजबूत बनाने के लिए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए लागत घटाना भी उतना ही जरूरी है। वे मंगलवार को ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 64वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

किसानों और वैज्ञानिकों को नमन

श्री चौहान ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के शताब्दी वर्ष का स्मरण करते हुए की और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न आत्मनिर्भरता में स्वामीनाथन का योगदान अमिट है। मंत्री ने किसानों की मेहनत और वैज्ञानिकों के शोध की सराहना करते हुए कहा कि इन्हीं प्रयासों से आज भारत एक सशक्त कृषि राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है।

उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि

कृषि मंत्री ने बताया कि बीते 10-11 वर्षों में गेहूं उत्पादन 86.5 मिलियन टन से बढ़कर 117.5 मिलियन टन हो गया है, जो लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऐतिहासिक है, लेकिन हमें अभी भी प्रति हेक्टेयर उत्पादन को वैश्विक औसत तक ले जाने की दिशा में गंभीर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि गेहूं और चावल के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर है, लेकिन अब समय की मांग है कि दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाई जाए ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।

जौ और पारंपरिक अनाज का महत्व

अपने भाषण में श्री चौहान ने कहा कि जौ जैसे परंपरागत अनाज का औषधीय महत्व है, और इसके प्रोत्साहन की दिशा में और कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे बायोफोर्टिफाइड गेहूं विकसित करें और असंतुलित खादों के उपयोग से मृदा की गुणवत्ता पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकने की दिशा में कदम उठाएं।

नकली खाद और कीटनाशकों पर सख्ती

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को नकली खाद और कीटनाशकों से बचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों के उत्पाद से फसल को नुकसान हुआ है, उनके लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।

छोटे किसानों के लिए एकीकृत खेती पर जोर

श्री चौहान ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए एकीकृत खेती (Integrated Farming) को लाभकारी रास्ता बताया। इसमें खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़ने की आवश्यकता है।

‘लैब से लैंड’ तक शोध पहुँचाने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में श्री चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यहां से निकले सुझावों और निष्कर्षों पर ठोस रोडमैप तैयार कर उसे लागू किया जाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अपने शोध को किसानों तक पहुंचाएं ताकि “लैब से लैंड” का सपना साकार हो सके।

 

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