युवाओं की भूमिका से बनेगा विकसित भारत, एआई युग में सतत शिक्षा जरूरी: उप-राष्ट्रपति

चेन्नई में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उप-राष्ट्रपति ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और एआई युग में निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया।

  • उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई स्थित डॉ. एम.जी.आर. शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान के 34वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
  • उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे अहम है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में निरंतर कौशल विकास और आजीवन सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • उप-राष्ट्रपति ने मूल्य आधारित शिक्षा, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और शॉर्टकट से बचकर संतुलित जीवन अपनाने का संदेश दिया।

समग्र समाचार सेवा
चेन्नई | 03 जनवरी: भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई स्थित डॉ. एम.जी.आर. शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान के 34वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में सतत शिक्षा की आवश्यकता और बढ़ गई है।

दीक्षांत समारोह: नए चरण की शुरुआत

उप-राष्ट्रपति ने नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उत्तीर्ण विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें अवसरों के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि छात्र अपने व्यावसायिक ज्ञान, करुणा और प्रतिबद्धता के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देंगे।

तमिलनाडु की ज्ञान परंपरा का उल्लेख

तमिलनाडु की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा और समुद्री व्यापार की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस भूमि से भारत के विचार, नैतिक मूल्य और संस्कृति विश्वभर में पहुंचे। यह भारत की सभ्यतागत आत्मविश्वास और सीखने-समझने के खुले दृष्टिकोण को दर्शाता है।

विकसित भारत@2047 में युवाओं की भागीदारी

उप-राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत@2047 की दृष्टि का हवाला देते हुए कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।


एआई और उभरती तकनीकें: आजीवन सीखने का संदेश

तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य पर बोलते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि एआई और नई प्रौद्योगिकियां सभी क्षेत्रों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निरंतर कौशल विकास, आजीवन सीखने की मानसिकता और अपने मूल विषयों से परे नई तकनीकों से जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है।

मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार केवल उपलब्धियां नहीं, बल्कि नैतिकता, सत्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व भी होना चाहिए। सफलता और विफलता—दोनों जीवन का हिस्सा हैं, जिनका सामना संतुलन और मानसिक दृढ़ता के साथ करना चाहिए।

शॉर्टकट से बचने की सलाह

उप-राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को कम समय में सफलता पाने के शॉर्टकट और अस्वस्थ तुलनाओं से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, निरंतर प्रगति और अपनी विशिष्ट क्षमताओं की पहचान कर आगे बढ़ने का संदेश दिया।


समापन संदेश

अपने संबोधन के अंत में उप-राष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण और सेवाभाव से भरा जीवन जीने तथा व्यक्तिगत उत्कृष्टता के माध्यम से सामूहिक रूप से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री एम.ए. सुब्रमणियन, संस्थान के कुलाधिपति डॉ. ए.सी. षणमुगम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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