- 8वें वेतन आयोग के समक्ष प्रोफेशनल टैक्स में पूरी छूट की सिफारिश की गई।
- नई टैक्स व्यवस्था में फिलहाल प्रोफेशनल टैक्स पर कोई छूट नहीं।
- कर्मचारी यूनियनों का तर्क- केंद्र सरकार को टैक्स देने के बाद राज्यों द्वारा वसूली अतिरिक्त बोझ।
- राज्य सरकारें प्रोफेशनल टैक्स का इस्तेमाल स्थानीय विकास कार्यों में करती हैं।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 जुलाई : आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में उत्सुकता बढ़ती जा रही है। इसी बीच, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ पक्ष ने वेतन आयोग के समक्ष एक अहम मांग रखी है। इस मांग के तहत कर्मचारियों पर लगने वाले प्रोफेशनल टैक्स से पूरी तरह छूट देने की सिफारिश की गई है। कर्मचारियों का तर्क है कि केंद्रीय कर्मचारी पहले से ही केंद्र सरकार को आयकर और रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी चुका रहे हैं, ऐसे में राज्यों द्वारा लगने वाला प्रोफेशनल टैक्स उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 276 के तहत राज्य सरकारें प्रोफेशनल टैक्स वसूलती हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 2500 रुपये सालाना है। फिलहाल, पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में कर्मचारियों को इस टैक्स पर छूट मिलती है, लेकिन नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में ऐसी कोई छूट नहीं है। यूनियनों का कहना है कि 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट में सभी केंद्रीय कर्मचारियों को इस टैक्स से पूर्ण छूट की सिफारिश करे।
राज्य सरकारें इस टैक्स से जुटाई गई राशि का उपयोग स्थानीय निकायों के ज़रिए स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर विकास जैसी सेवाओं में करती हैं। कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि टैक्स का यह बोझ पूरी तरह से हटाया जाए, ताकि केंद्रीय कर्मचारियों को ज्यादा राहत मिल सके।
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