मोदी पुतिन और जिनपिंग की चीन में केमिस्ट्री से इंटरनेशनल मीडिया में हलचल ट्रंप बढ़ती नजदीकियों से टेंशन में

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 1 सितंबर: चीन के ऐतिहासिक शहर तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर वैश्विक मीडिया में भारत-चीन की नजदीकियों के संकेत दिए जा रहे हैं। खासकर मोदी और जिनपिंग की “दोस्ती” पर इंटरनेशनल प्रेस ने विशेष ध्यान दिया है। इन बढ़ते रिश्तों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ा दी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का विश्लेषण

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि मोदी और जिनपिंग की मुलाकात भारत-चीन संबंधों में “नए सकारात्मक बदलाव” का प्रतीक है। रिपोर्ट के अनुसार SCO मंच से चीन ने यह संदेश दिया है कि अब अमेरिका अकेला वैश्विक निर्णयकर्ता नहीं है। अमेरिका के टैरिफ वॉर और भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर बढ़ते दबाव के बीच चीन और भारत की नजदीकियां अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

सीएनएन की सुर्खियाँ

अमेरिकी नेटवर्क सीएनएन ने इस मुलाकात को एशिया और वैश्विक राजनीति दोनों के लिए अहम बताया। शीर्षक में लिखा गया— “Xi and Modi talk friendship in a ‘chaotic’ world as Trump’s tariffs bite”। सीएनएन ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ और भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव के बीच मोदी-जिनपिंग की “दोस्ती” का संदेश न केवल एशिया बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर डाल सकता है।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने, बंद उड़ानों को फिर शुरू करने और वीज़ा संबंधी रियायतों पर सहमति जताई है।

बीबीसी की नज़र में मोदी-जिनपिंग नजदीकियां

ब्रिटिश मीडिया बीबीसी ने भी भारत और चीन की नजदीकियों को “सकारात्मक मोड़” करार दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा विवाद और 2020 की झड़पों के बावजूद अब भरोसे का नया माहौल बन रहा है। बीबीसी ने लिखा कि तियानजिन में हुई इस मुलाकात ने संकेत दिया है कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बन सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि 2020 के बाद रुकी भारत-चीन उड़ानों को फिर से शुरू किया जाएगा।

आउटलुक वर्ल्ड का आर्थिक दृष्टिकोण

वर्ल्ड आउटलुक ने भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि 7.8% की विकास दर ने ट्रंप के भारत को “कमजोर अर्थव्यवस्था” कहने के दावों को खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार भारत घरेलू खपत आधारित वृद्धि के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में मजबूत स्थिति रखता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन का अहम खिलाड़ी बन सकता है।

चीन दिखाना चाहता है ताकत

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक अन्य रिपोर्ट “China Shows Off Its Power” में लिखा गया है कि SCO मंच पर चीन ने यह संदेश दिया कि अमेरिका अब अकेला वैश्विक निर्णयकर्ता नहीं है। रिपोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रंप की असंगत नीतियाँ—कभी पुतिन को रेड कार्पेट तो कभी मोदी पर टैरिफ—चीन को रणनीतिक लाभ पहुँचा रही हैं।

मोदी, पुतिन और जिनपिंग की तियानजिन में हुई “केमिस्ट्री” ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दी है। जहाँ भारत और चीन के रिश्तों में नरमी और साझेदारी के संकेत मिल रहे हैं, वहीं अमेरिका के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है। वैश्विक मीडिया का मानना है कि SCO मंच से उभरी यह नजदीकी आने वाले वर्षों में विश्व शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करेगी।

 

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