समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 2 सितंबर: उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए मंगलवार की कैबिनेट बैठक बड़ी सौगात लेकर आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन को मंजूरी दी गई।
इस निगम के माध्यम से कर्मचारियों को समय पर वेतन, ईपीएफ कटौती और अन्य लाभ सुनिश्चित किए जाएंगे। साथ ही उन्हें शोषण से बचाने और हितों की रक्षा की गारंटी भी होगी।
नई निर्यात नीति को हरी झंडी
कैबिनेट ने यूपी की नई निर्यात नीति को मंजूरी दे दी है। यह नीति वर्ष 2030 तक लागू रहेगी और इसमें व्यापारिक चुनौतियों, टैरिफ वार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए निर्यातकों व कारोबारियों को विशेष रियायतें दी जाएंगी।
नई नीति से यूपी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और राज्य को भारत के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
कानपुर और लखनऊ को मिलेंगी 200 नई ई-बसें
बैठक में नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कानपुर और लखनऊ के लिए 100-100 नई ई-बसें खरीदने का निर्णय लिया गया। इससे दोनों शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा
बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत विभिन्न कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इसके साथ ही आईटी विभाग की उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण नीति-2025 को भी हरी झंडी मिल गई। इसका उद्देश्य यूपी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है।
स्टांप विभाग को सरकारी विभाग घोषित करने का औपचारिक प्रस्ताव भी कैबिनेट से पास हो गया।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी पेश
बैठक में संभल मामले की न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी कैबिनेट के समक्ष रखी गई। हालांकि इस पर विस्तृत चर्चा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट बैठक कई अहम फैसलों की गवाह बनी। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नया निगम, निर्यात नीति, ई-बसें और औद्योगिक निवेश संबंधी निर्णयों से साफ है कि यूपी सरकार रोजगार, व्यापार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत बनाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है।
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