सरकारी नौकरियों की मांग पर सड़कों पर उतरे बिहार के छात्र, चुनाव से पहले निकली चेतावनी

समग्र समाचार सेवा
पटना, 15 सितंबर: बिहार में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और पुलिस कांस्टेबल समेत सरकारी नौकरियों की कमी को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से न तो पुलिस भर्ती की कोई नई वैकेंसी निकली है और न ही अन्य सरकारी पदों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई है। छात्रों की मांग है कि चुनाव से पहले सरकार भर्ती से संबंधित अधिसूचना जारी करे।

हालांकि चुनाव आयोग ने अभी बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर में मतदान हो सकता है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन चुनावी हलचल से पहले ही सरकार के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।

मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च

प्रदर्शनकारी छात्र पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास की ओर बढ़े और ‘मुख्यमंत्री आवास घेराव’ अभियान चलाया। इस दौरान छात्रों ने बिहार पुलिस सब-ऑर्डिनेट सर्विस कमीशन (BPSSC) और सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कॉन्स्टेबल (CSBC) की परीक्षाओं की आंसर की और प्रश्नपत्रों की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने की मांग रखी।

प्रदर्शनकारी खुशबू पाठक ने बैरिकेड्स पर चढ़कर कहा, “छात्र कई बार अन्याय के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं, लेकिन प्रशासन हमारी बात नहीं सुन रहा। आज हमें सड़कों पर उतरना पड़ा। हमारा विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण है। folded hands के साथ हम सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की गुहार लगा रहे हैं।”

छात्रों का दर्द और नाराज़गी

एक अन्य छात्र नितीश कुमार ने कहा कि दो साल से कोई नई वैकेंसी नहीं आई है, जिससे पटना में रहकर पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, “हम संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन हमें रोक रहा है। हम गरीब किसानों के बेटे हैं, इसलिए पुलिस भर्ती की तैयारी करते हैं। परंतु दो साल से भर्ती न होने से हम कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।”

इसी तरह, अमन कुमार यादव ने कहा कि वे केवल मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव से ही मिलना चाहते हैं।

परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

सीएसबीसी द्वारा आयोजित बिहार पुलिस कांस्टेबल परीक्षा 15 जुलाई से 3 अगस्त तक कई चरणों में हुई थी। वहीं, बीपीएसएससी ने 29 मई को परिवहन विभाग में प्रवर्तन उप निरीक्षक (Enforcement Sub Inspector) की 33 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, छात्रों का कहना है कि इतनी कम संख्या में भर्तियां बेरोजगार युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकतीं।

इससे पहले 9 सितंबर को भी छात्रों ने पटना में टीच भर्ती (TRE-4) के तहत शिक्षकों की पदों में कमी का विरोध करते हुए मार्च निकाला था।

राजनीतिक माहौल गरमाया

बिहार का यह छात्र आंदोलन ऐसे समय पर हो रहा है जब राज्य में चुनावी बिसात बिछने लगी है। एक ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की अगुवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और राजद (RJD) समेत इंडिया ब्लॉक (INDIA Bloc) सत्ता परिवर्तन की तैयारी में जुटा है। ऐसे में छात्रों का यह आंदोलन सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

 

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