नागालैंड सीपीए सम्मेलन में उपसभापति हरिवंश ने रेखांकित किया उत्तर-पूर्व का बदलता चेहरा
नागालैंड में 22वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोले उपसभापति — केंद्र सरकार की बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी योजनाएँ उत्तर-पूर्व की आकांक्षाओं को दे रही हैं नई दिशा
-
उपसभापति हरिवंश ने कहा, पिछले एक दशक में उत्तर-पूर्व की सामाजिक और आर्थिक आकांक्षाओं पर अभूतपूर्व ध्यान दिया गया।
-
2014 के ₹24,500 करोड़ के बजट से बढ़कर अब ₹1.8 लाख करोड़ तक हुआ उत्तर-पूर्व क्षेत्र का बजटीय व्यय।
-
10 वर्षों में 6,000 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और 45,000 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण पूरा।
-
वर्ष के अंत तक उत्तर-पूर्व के हर गाँव को 4जी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य।
समग्र समाचार सेवा
नागालैंड, 10 नवम्बर: राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने सोमवार को नागालैंड में आयोजित 22वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जिनके परिणाम अब क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी में स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
उपसभापति ने कहा, “उत्तर-पूर्व में बजट का 10% व्यय करने की नीति प्रारंभ में महत्वाकांक्षी प्रतीत होती थी, लेकिन आज यह नीति विकास की सफलता का प्रतीक बन चुकी है। 2014 में यह बजट ₹24,500 करोड़ था, जो इस वित्तीय वर्ष में ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।”
उन्होंने आगे बताया कि “लगभग छह दशक पहले तक इस क्षेत्र में केवल 10,900 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों में 6,000 किमी और जोड़े गए हैं। पीएमजीएसवाई के तहत 45,000 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है और वर्ष के अंत तक हर गाँव 4जी नेटवर्क से जुड़ जाएगा।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के लगभग 70 दौरों और केंद्रीय मंत्रियों की लगातार यात्राएँ इस बात का संकेत हैं कि उत्तर-पूर्व अब भारत की विकास प्राथमिकताओं के केंद्र में है।
उपसभापति ने यह भी कहा कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र को विकास आकांक्षाओं और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की अनूठी आवश्यकता है। यह क्षेत्र भारत की कुल भूमि का 8% और वन क्षेत्र का 21% प्रतिनिधित्व करता है।
सम्मेलन का विषय था, “नीति, प्रगति और लोग: परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में विधानमंडल”, जिसमें “विकसित भारत 2047 में विधानमंडलों की भूमिका” और “उत्तर-पूर्व में जलवायु परिवर्तन” जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
अपने संबोधन में श्री हरिवंश ने जयप्रकाश नारायण के योगदान और 1960 के दशक में नागालैंड में शांति स्थापना हेतु उनके प्रयासों को भी याद किया।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, नागालैंड के मुख्यमंत्री डॉ. नेफ्यू रियो और नागालैंड विधानसभा अध्यक्ष श्री शारिंगैन लोंगकुमेर भी उपस्थित रहे।
Comments are closed.