राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन, 11 शास्त्रीय भाषाओं की 2,300 से अधिक रचनाएँ एक ही छत के नीचे

शास्त्रीय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम: राष्ट्रपति भवन में ग्रंथ कुटीर आरंभ

  • ग्रंथ कुटीर में 11 शास्त्रीय भाषाओं की लगभग 2,300 पुस्तकें और 50 पांडुलिपियाँ
  • महाकाव्य, दर्शन, विज्ञान, भक्ति साहित्य सहित संविधान भी संग्रह का हिस्सा
  • ज्ञान भारतम मिशन के तहत संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार पर जोर
  • ऑनलाइन पोर्टल और गाइडेड टूर के माध्यम से आमजन और शोधकर्ताओं को पहुँच

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 24 जनवरी: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ का उद्घाटन किया। यह कुटीर भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं- तमिल, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला में रचित ज्ञान परंपरा को समर्पित है।

समृद्ध संग्रह की विशेषताएँ

ग्रंथ कुटीर में लगभग 2,300 पुस्तकें और 50 दुर्लभ पांडुलिपियाँ संग्रहीत हैं। इनमें महाकाव्य, दर्शन, भाषा विज्ञान, इतिहास, शासन, विज्ञान, आयुर्वेद और भक्ति साहित्य से जुड़ी रचनाएँ शामिल हैं। कई पांडुलिपियाँ ताड़पत्र, कागज, छाल और वस्त्र जैसी पारंपरिक सामग्रियों पर हस्तलिखित हैं। शास्त्रीय भाषाओं में भारत का संविधान भी इस संग्रह का हिस्सा है।

शास्त्रीय भाषाओं का विस्तार

भारत सरकार द्वारा 3 अक्टूबर 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के बाद अब कुल 11 भाषाएँ इस श्रेणी में शामिल हैं। ग्रंथ कुटीर इन सभी भाषाओं की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को एक मंच पर प्रस्तुत करता है।


संस्थागत सहयोग और संरक्षण

ग्रंथ कुटीर का विकास केंद्र व राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं के सहयोग से हुआ है। शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) पांडुलिपियों के प्रबंधन, संरक्षण और प्रलेखन में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।

ज्ञान भारतम मिशन से जुड़ाव

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत का संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यापक प्रसार करना है, ताकि परंपरा और प्रौद्योगिकी का समन्वय भविष्य की पीढ़ियों तक पहुँचे।

आगंतुकों और शोधकर्ताओं के लिए सुविधा

राष्ट्रपति भवन सर्किट-1 के गाइडेड टूर के दौरान आगंतुक ग्रंथ कुटीर की रचनाओं की झलक देख सकेंगे। साथ ही, ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पुस्तकों और पांडुलिपियों तक डिजिटल पहुँच उपलब्ध होगी। शोधकर्ता पोर्टल के जरिए भौतिक पहुँच के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

राष्ट्रपति का संदेश

उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शास्त्रीय भाषाओं में संचित ज्ञान हमें अपने समृद्ध अतीत से सीखने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि विरासत और विकास का यह मेल भारत के मार्गदर्शक सिद्धांत को सुदृढ़ करता है। राष्ट्रपति ने युवाओं को कम से कम एक शास्त्रीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालयों में इनके अध्ययन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

उपस्थित गणमान्य

इस अवसर पर संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी, विषय विशेषज्ञ, दानदाता और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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