समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 3 मई : विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स (IWPC) ने “वैश्विक उथल-पुथल के बीच प्रेस स्वतंत्रता की सुरक्षा” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न मीडिया संगठनों और पत्रकारों ने हिस्सा लेकर पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया।
यह चर्चा ऐसे समय में आयोजित हुई जब रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष की तुलना में भारत की रैंकिंग में छह स्थान की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे लेकर वक्ताओं ने चिंता जताई।
कार्यक्रम में प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. नाइक, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव राघवन श्रीनिवासन तथा फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC) के अध्यक्ष डॉ. वाइल अव्वाद प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा पत्रकार भी चर्चा में शामिल हुए।
डॉ. वाइल अव्वाद ने कहा कि पत्रकारों पर हमले अब केवल आकस्मिक घटनाएं नहीं रह गए हैं, बल्कि यह सच को दबाने की एक सुनियोजित कोशिश का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों, विशेषकर गाजा में पत्रकारों की लक्षित हत्याएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव राघवन श्रीनिवासन ने मीडिया जगत के भीतर बढ़ती संरचनात्मक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मीडिया में मालिकाना हितों से प्रभावित खबरें और संपादकीय दबाव अब सामान्य होते जा रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी पत्रकारिता के मूल मूल्यों और जिम्मेदारियों को पर्याप्त रूप से समझ नहीं पा रही है। साथ ही उन्होंने पारंपरिक मीडिया संस्थानों के सामने मौजूद आर्थिक संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि घटती पाठक संख्या और दर्शक वर्ग का सीधा असर वित्तीय स्थिरता और संपादकीय स्वतंत्रता पर पड़ रहा है।
प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.के. नाइक ने पत्रकार बिरादरी के भीतर एकजुटता की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के संगठन कमजोर हो गए हैं और सामूहिक प्रतिरोध की भावना कमज़ोर पड़ती जा रही है, जबकि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे अधिक जरूरत एकता और सहयोग की है।
कार्यक्रम के समापन पर IWPC की अध्यक्ष सुजाता राघवन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मंच सामूहिक रूप से चिंतन करने, अपनी आवाज उठाने और पत्रकारिता के लिए अधिक सुरक्षित एवं मजबूत वातावरण तैयार करने का प्रयास है।
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