गुमिन मिजे मामला : हिरासत में यातना आरोपों पर असम सरकार ,पेमा खांडू

  •  गुमिन मिजे अरुणाचल एंटी-ड्रग वॉरियर्स (APADW) के अध्यक्ष हैं।
  • उन्हें 20 मई को असम पुलिस ने ईटानगर से गिरफ्तार किया।
  •  मामला असम के लखीमपुर जिले के बिहपुरिया थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
  • *उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

समग्र समाचार सेवा
ईटानगर/गुवाहाटी 28 मई : अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एंटी-ड्रग कार्यकर्ता गुमिन मिजे के कथित हिरासत यातना मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो के बाद यह मामला अरुणाचल प्रदेश और असम दोनों राज्यों में चर्चा का विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया पर मामला देखने के बाद असम सरकार से संपर्क किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश किसी अन्य राज्य की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन राज्य सरकार ने अपनी चिंता मजबूती से असम सरकार के समक्ष रखी है। गुमिन मिजे अरुणाचल एंटी-ड्रग वॉरियर्स (APADW) के अध्यक्ष हैं। उन्हें 20 मई को असम पुलिस ने ईटानगर से गिरफ्तार किया।

 FIR में आरोप है कि 15 मई को 12-15 लोगों के समूह ने एक घर में घुसकर हमला, लूटपाट और फायरिंग की। शिकायतकर्ता पोपी काकती ने आरोप लगाया कि उनके पति रुपम काकती को निशाना बनाया गया। समर्थकों का दावा है कि मिजे एंटी-ड्रग अभियान के तहत वहां गए थे और आत्मरक्षा में चेतावनी स्वरूप गोली चलाई थी। गिरफ्तारी के बाद शरीर पर चोट के निशान दिखाने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। कई संगठनों ने आरोप लगाया कि ड्रग माफिया से संघर्ष के कारण मिजे को निशाना बनाया गया। नॉर्थ ईस्ट के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। नाहरलगुन निवासी बुटेंग तायेंग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

बिहपुरिया पुलिस ने हिरासत में यातना के आरोपों से इनकार करते हुए वायरल तस्वीरों को AI जनरेटेड बताया है।

मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि गुमिन मिजे ने पिछले कई वर्षों से राज्य में नशे के खिलाफ सराहनीय कार्य किया है और कई ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी में भी सहयोग दिया है। उन्होंने असम सरकार से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि हिरासत के दौरान मिजे के साथ किसी प्रकार की प्रताड़ना न हो। 

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