- नासिक टीसीएस यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में गर्भवती नीदा खान को जमानत
- अदालत ने कहा- जेल में प्रसव का मानसिक और सामाजिक आघात असहनीय
- जांच पूरी हो चुकी, आरोप पत्र दाखिल; आगे हिरासत जरूरी नहीं: कोर्ट
- नीदा खान पर पीड़िता के धार्मिक विचार बदलने का प्रयास करने के आरोप
समग्र समाचार सेवा
नासिक, 11 जुलाई : महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) कार्यालय से जुड़े चर्चित यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार गर्भवती आरोपी नीदा खान को नासिक की स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी ने कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में प्रसव का अनुभव मानसिक और सामाजिक रूप से अत्यंत कष्टदायक होता है, ऐसे में नीदा खान को हिरासत में रखना उचित नहीं।
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में माना कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि नीदा खान ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर पीड़िता के धार्मिक और वैचारिक विचारों को प्रभावित करने का प्रयास किया था। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया है और जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए आरोपी को आगे हिरासत में रखना अनिवार्य नहीं है।
नीदा खान को 75,000 रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया गया है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि नीदा खान पांच माह की गर्भवती हैं और जेल में रहना उनके और नवजात के लिए हानिकारक हो सकता है।
इस मामले में अभियोजन ने जमानत का विरोध किया था, यह कहते हुए कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से पीड़िता पर धार्मिक दबाव और यौन शोषण का प्रयास किया। नासिक पुलिस की एसआईटी इस प्रकरण से जुड़े नौ मामलों की जांच कर रही है, जिनमें महिला कर्मचारियों के शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं।
टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि कंपनी कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है और संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।
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