- प्रसिद्ध गायिका एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में मैसूरु (कर्नाटक) में निधन, हजारों लोगों ने अंतिम दर्शन किए।
- उनका पार्थिव शरीर महाराजास कॉलेज ग्राउंड में आम जनता के लिए रखा गया, अंतिम संस्कार आज शाम राजकीय सम्मान के साथ।
- छह दशकों तक तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ सहित कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज़ दी।
- संगीतकार, फिल्म जगत, राजनीतिक हस्तियों और फैंस ने जानकी को अद्वितीय विरासत और मानवीय संवेदनाओं की आवाज़ बताया।
समग्र समाचार सेवा
मैसूरु, 12 जुलाई : दक्षिण भारत की सुर-सम्राज्ञी, ‘नाइटिंगेल ऑफ साउथ’ के नाम से मशहूर एस. जानकी का शनिवार शाम 88 वर्ष की उम्र में मैसूरु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ वर्षों से मैसूरु के बोगादी क्षेत्र में रह रही थीं। शनिवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वे बचाई नहीं जा सकीं।
उनकी अंतिम यात्रा के लिए पार्थिव शरीर महाराजा कॉलेज ग्राउंड में रखा गया, जहां हजारों प्रशंसक, कलाकार, नेता और संगीतकार उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों तथा फिल्मी हस्तियों ने गहरा शोक जताया।
एस. जानकी ने अपने 60 साल के करियर में हर पीढ़ी के संगीतकारों के लिए गाया। तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी समेत कई भाषाओं में करीब 48,000 गाने गाए। उनके गीतों में हर मानवीय भावना—प्रेम, वेदना, शरारत, भक्ति, ममता—का अद्भुत संप्रेषण था।
2013 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, मगर उन्होंने इसे “बहुत देर से दिया गया सम्मान” कहते हुए स्वीकार नहीं किया। वे चाहती थीं कि कलाकारों को उनके जीवनकाल में ही सर्वोच्च सम्मान मिले।
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