- 15 मई के ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला परिसर में रोजाना सुबह-शाम नियमित पूजा और आरती शुरू, श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी।
- शुक्रवार को परिसर में नमाज नहीं, जबकि मंगलवार को विशेष पूजा का क्रम यथावत; धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति मिली।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ‘सरस्वती लोक’ परियोजना की घोषणा की, ब्रिटिश म्यूजियम से मां सरस्वती की मूर्ति वापस लाने के प्रयास भी तेज।
- पूजा व्यवस्था के लिए एएसआई ने नई गाइडलाइन तैयार की, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद प्रशासन निर्देशों के अनुरूप अगली प्रक्रिया तय करेगा।
समग्र समाचार सेवा
धार ,मध्य प्रदेश, 15 जुलाई : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के 15 मई 2026 के ऐतिहासिक फैसले के दो माह बाद धार स्थित भोजशाला परिसर में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आदेश के बाद से यहां प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित पूजा-अर्चना और आरती हो रही है। श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिली है।
फैसले से पहले की व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार को परिसर में नमाज नहीं कराई जाती, जबकि हर मंगलवार विशेष पूजा का आयोजन पूर्ववत जारी है। इन दो महीनों में न सिर्फ धार्मिक गतिविधियां बढ़ी हैं, बल्कि विकास परियोजनाओं को भी गति मिली है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 मई को परिसर का दौरा कर ‘सरस्वती लोक’ परियोजना की घोषणा की थी। इसके तहत परिसर के समग्र विकास की योजना, ड्रोन सर्वे समेत तकनीकी सर्वेक्षण पूरे किए जा चुके हैं।
पूजा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दिशा-निर्देश तैयार कर स्वीकृति के लिए दिल्ली मुख्यालय भेज दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रशासन न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाएगा।
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